रविवार को कितने बजे है होलिका दहन का शुभ मुहूर्त? इन 11 प्वाइंट्स में जानें पूरी पूजा विधि Holika Dahan Timing 2021:

एजुकेशन

नई दिल्ली/नोएडा/गाजियाबाद, ऑनलाइन डेस्क। Holika Dahan Timing 2021: हिंदुओं के प्रमुख त्योहारों में शुमार होली पूरे देश में  29 मार्च (सोमवार) को मनाई जाएगी। इससे पहले 28 मार्च (रविवार) को होलिका दहन होगा। हिंदुओं की रीति की अनुसार, रविवार शाम को पूर्णिमा पर रात को होलिका का दहन होगा। विद्वानों के मुताबिक, भद्रा दिन में 1 बजकर 33 बजे समाप्त होगी और पूर्णिमा तिथि रात में 12:40 तक ही  रहेगी। ऐसे में भद्रा रहित पूर्णिमा तिथि में ही होलिका दहन शुभ होता है और इस लिहाज से  रविवार रात में 12:30 बजे से पूर्व होलिका दहन करना ठीक होगा, क्योंकि रात में 12:30 बजे के बाद प्रतिपदा तिथि लग जाएगी।

वीरेंद्र नंदा (मुख्य पुजारी, सनातन धर्म मंदिर, नोएडा सेक्टर-19) का कहना है कि होली के दिन चंद्रमा कन्या राशि में गोचर करेगा और मकर राशि में गुरु और शनि विराजमान हैं। इतना ही नहीं, शुक्र और सूर्य मीन राशि में हैं। वीरेंद्र नंदा ने बताया कि होली दहन का मुहूर्त रविवार शाम 6:21 बजे से रात 8:41 बजे तक है। पूर्णिमा तिथि 28 मार्च को सुबह करीब 03:30 बजे से 29 मार्च की रात करीब 12.15 बजे तक रहेगी।

2 घंटे 20 मिनट तक रहेगा होलिका दहन का मुहूर्त

वहीं, पंचांग के मुताबिक, रविवार शाम 18 बजकर 37 मिनट से रात्रि 20 बजकर 56 मिनट तक होलिका दहन का मुहूर्त होगा। इस तरह 2 घंटे 20 मिनट तब होलिका दहन का मुहूर्त रहेगा। विद्वानों का कहना है कि इसी मुहूर्त में होलिका दहन करना अत्यंत शुभ है। इस वर्ष होलिका दहन के समय भद्रा नहीं रहेगी।

क्रमवार जानिये होली पूजा की विधि

  1. होलिका दहन पूजन के दौरान हमेशा अपना सिर कपड़े से ढककर रखें
  2.  नवविवाहित महिलाएं व सास और बहु एक साथ होलिका दहन न देंखे
  3. होली पूजा से पूर्व स्नान जरूर करना चाहिए। इससे आप भीतर से प्रसन्नचित महसूस करेंगे।
  4. होलिका पूजे से पूर्व अक्षत्, गंध, फूल, कच्चा सूत, एक लोटा जल, माला, रोली, गुड़, गुलाल, रंग, नारियल, गेंहू की बालियां, मूंग पहले से एकत्र कर लें
  5. पूजा सामग्री के साथ होलिका के स्थान पर पहुंचे फिर नियमानुसार पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठें।
  6. पूजा करने के क्रम में गंध, धूप, पुष्प आदि से होलिका की पंचोपचार विधि से शुरुआत करें।
  7. पूजा के दौरान अपने पितरों, परिवार के नाम से बड़गुल्ले की एक-एक माला होलिका को समर्पित करें। इसके बाद 3 या 7 बार परिक्रमा करें। इस दौरान कच्चा सूत होलिका में लपेट दें।
  8. पूजा के क्रम में अब लोटे का जल तथा अन्य पूजा सामग्री होलिका को समर्पित कर दें। इसी के साथ होली की पूजा पूर्ण हो जाएगी।
  9. होली पूजा के बाद बताए गए मुहूर्त में परिजनों के साथ सार्वजनिक स्थान पर बनी होलिका के पास एकत्र हो जाएं।
  10. विधि के अंतिम चरण में कपूर या उप्पलों की मदद से होलिका में आग प्रज्जवलित कर दें।
    रविवार शाम को पूर्णिमा पर रात को होलिका का दहन होगा।

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