नई दिल्ली : NEET पेपर लीक और दिल्ली में प्रदर्शनकारियों पर पुलिस कार्रवाई को लेकर समाजसेवी अन्ना हजारे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चिट्ठी लिखी है। उन्होंने सरकार से संवाद का रास्ता अपनाने की अपील की है।
‘जनता की आवाज मत दबाइए’
अन्ना ने पत्र में लिखा, “जनता की आवाज मत दबाइए, बातचीत कीजिए।” उन्होंने कहा कि देश के लाखों युवा पेपर लीक, बेरोजगारी और परीक्षा में देरी से परेशान हैं। इस साल 22 लाख छात्र परीक्षा में शामिल हुए थे। दोबारा पेपर लीक और मूल्यांकन में गड़बड़ी के चलते निराशा में 22 बच्चों ने जान दे दी।
‘इस्तीफा लेने से सरकार नहीं गिरती’
पिछले 25 दिनों से जंतर-मंतर पर बैठे छात्रों का समर्थन करते हुए अन्ना ने कहा कि वो संबंधित विभाग के मुखिया के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। “किसी का पद से हटना सरकार के गिरने की वजह नहीं बनता। इससे साफ संदेश जाता है कि लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी।”
उन्होंने कहा कि गड़बड़ी होने पर निचले कर्मचारियों पर गाज गिरती है और बड़े लोग बच निकलते हैं। सरकार को अच्छी बातों का श्रेय लेने के साथ-साथ गड़बड़ियों की सीधी जिम्मेदारी भी वरिष्ठों को लेनी चाहिए।
सोनम वांगचुक के मामले पर सवाल
अन्ना ने सोनम वांगचुक को अनशन स्थल से जबरन हटाए जाने पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि “इतने दिनों से आंदोलन चल रहा था, लेकिन किसी भी जिम्मेदार प्रतिनिधि ने जाकर उनसे बात करने की जहमत नहीं उठाई।”
उन्होंने आग्रह किया कि प्रदर्शनकारियों की आवाज को विपक्ष की आवाज मानकर खारिज न किया जाए। ये अपने ही देश के लोग हैं।
संवाद ही लोकतंत्र का रास्ता
महात्मा गांधी के सत्याग्रह और संवैधानिक मूल्यों की याद दिलाते हुए अन्ना ने कहा कि लोकतंत्र में टकराव से बेहतर रास्ता बातचीत का होता है। सरकार को संयम दिखाकर छात्रों और नागरिकों के बीच विश्वास दोबारा कायम करना चाहिए।
