बिजली साझेदारी मजबूत करेंगे भारत-नेपाल, 1,650 मेगावाट निर्यात का रास्ता साफ

विदेश

काठमांडू। नेपाल और भारत ने दो सीमा पार बिजली ट्रांसमिशन परियोजनाओं के जरिए दोनों देशों के बीच बिजली के आदान-प्रदान की मात्रा बढ़ाने पर सहमति जताई है। नेपाल के पश्चिमी शहर पोखरा में हुई नेपाल-इंडिया जॉइंट स्टीयरिंग कमेटी (जेएससी) की 13वीं बैठक में यह फैसला लिया गया। यह ऊर्जा सचिव स्तर की द्विपक्षीय बैठक थी। दोनों देशों ने सहमति बनाई कि नेपाल अब दो 400 केवी की सीमा पार ट्रांसमिशन लाइनों के माध्यम से भारत को अधिकतम 1,650 मेगावाट तक बिजली बेच सकेगा और भारत से 1,400 मेगावाट तक बिजली आयात कर सकेगा। बिजली के आदान-प्रदान के लिए जिन दो ट्रांसमिशन लाइनों का इस्तेमाल किया जाएगा, वे हैं धालकेबार-मुजफ्फरपुर 400 केवी ट्रांसमिशन लाइन और धालकेबार-सीतामढ़ी 400 केवी ट्रांसमिशन लाइन।
नेपाल के ऊर्जा, जल संसाधन और सिंचाई मंत्रालय के अनुसार, इनमें से धालकेबार-मुजफ्फरपुर ट्रांसमिशन लाइन वर्ष 2016 से चालू है, जबकि धालकेबार-सीतामढ़ी ट्रांसमिशन लाइन परियोजना लगभग पूरी होने वाली है।
भारत की सरकारी कंपनी एसजेवीएन लिमिटेड द्वारा नेपाल के पूर्वी हिस्से में 900 मेगावाट की अरुण-तीन जलविद्युत परियोजना के विकास के लिए बनाई गई एसजेवीएन अरुन-तीन पॉवर डेवलपमेंट कंपनी भी धालकेबार-सीतामढ़ी ट्रांसमिशन लाइन का निर्माण कर रही है।
इससे पहले दोनों देशों के बीच धालकेबार-मुजफ्फरपुर ट्रांसमिशन लाइन के जरिए नेपाल से भारत को 1,100 मेगावाट तक बिजली निर्यात करने और भारत से 1,000 मेगावाट तक बिजली आयात करने की अनुमति थी।
अब धालकेबार-सीतामढ़ी की बड़ी क्षमता वाली ट्रांसमिशन लाइन लगभग तैयार होने के कारण दोनों देशों ने बिजली व्यापार की सीमा बढ़ाने का फैसला किया है।
इस बैठक की सह-अध्यक्षता नेपाल के ऊर्जा, जल संसाधन और सिंचाई मंत्रालय की सचिव सरिता दवाडी और भारत के बिजली मंत्रालय के सचिव पंकज कुमार ने की।
जेएससी बैठक से पहले मंगलवार को संयुक्त सचिव स्तर की संयुक्त कार्य समूह (जेडब्‍ल्‍यूजी) की बैठक भी हुई।
दोनों देशों ने कई नई बड़ी क्षमता वाली सीमा पार ट्रांसमिशन परियोजनाओं के काम में तेजी लाने पर भी सहमति जताई।
नेपाल के ऊर्जा मंत्रालय के बयान के अनुसार, बैठक में चामेलिया (नेपाल)-जौलजीबी (भारत) 220 केवी डबल सर्किट ट्रांसमिशन लाइन की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) को मंजूरी दी गई। इसके निर्माण को दिसंबर 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
बैठक में नेपाल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी (एनईए) और भारत की पावर ग्रिड कॉर्पोरेशन ऑफ़ इंडिया लिमिटेड (पीजीसीआईएल) के बीच संयुक्त उद्यम कंपनी बनाने के काम को तेज करने पर भी सहमति बनी। यह कंपनी इनरुवा-न्यू पूर्णिया और डोडोधारा (न्यू लामकी)-बरेली 400 केवी सीमा पार ट्रांसमिशन लाइन परियोजनाओं को विकसित करेगी।
इन परियोजनाओं के लिए शेयरहोल्डर्स एग्रीमेंट (एसएचए) और जॉइंट वेंचर (जेवी) समझौते पर दोनों कंपनियां पहले ही हस्ताक्षर कर चुकी हैं।
बैठक में मोतिहारी-निजगढ़ 400 केवी डबल सर्किट ट्रांसमिशन लाइन की डीपीआर को भी मंजूरी दी गई। उम्मीद है कि यह परियोजना वर्ष 2034-35 तक नेपाल से भारत को अतिरिक्त बिजली निर्यात करने में मदद करेगी।
इसके अलावा, मुजफ्फरपुर-धालकेबार 400 केवी ट्रांसमिशन लाइन की क्षमता बढ़ाने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी गई। इसके लिए मौजूदा तारों को हाई टेम्परेचर लो सैग कंडक्टर से बदला जाएगा, जिससे बिजली पहुंचाने की क्षमता बढ़ेगी।
मंत्रालय ने बताया कि प्रस्तावित लखनऊ-कोहलपुर (लमही) 400 केवी ट्रांसमिशन लाइन परियोजना को अंतिम रूप देने से पहले अतिरिक्त तकनीकी अध्ययन किए जाएंगे।
बैठक में न्यू बुटवल-गोरखपुर 400 केवी सीमा पार ट्रांसमिशन लाइन को लेकर भी सहमति बनी।
नेपाल वाले हिस्से का काम अगस्त 2026 तक पूरा होने की उम्मीद है, जबकि न्यू बुटवल 400 केवी सबस्टेशन दिसंबर 2027 तक पूरा होगा। इसलिए सबस्टेशन बनने तक यह ट्रांसमिशन लाइन अस्थायी रूप से 220 केवी क्षमता पर चलाई जाएगी।
इस परियोजना के नेपाल वाले हिस्से का निर्माण अमेरिका सरकार की सहायता एजेंसी मिलेनियम चैलेंज कॉर्पोरेशन (एमसीसी) की फंडिंग से किया जा रहा है।
नेपाल के ऊर्जा मंत्रालय ने कहा, “इस अंतरिम व्यवस्था के तहत यह ट्रांसमिशन लाइन भारत से 130 मेगावाट तक बिजली आयात करने और नेपाल से 200 मेगावाट तक बिजली निर्यात करने में सक्षम होगी।”

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