भारत-पाकिस्तान वार्ता की पैरवी करने वालों पर भड़के जम्मू-कश्मीर के एलओपी सुनील शर्मा, बोले- ‘ये गंभीर विषय’

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जम्मू । जम्मू-कश्मीर विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष सुनील शर्मा ने भारत-पाकिस्तान के बीच बातचीत की पैरवी करने वालों की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा मजबूत करने की जारी कोशिशों के बीच इस मांग को अनुचित बताया। विपक्ष के नेता सुनील शर्मा ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बात करते हुए कहा, “इस देश की एक अजीब विडंबना है। जो विषय किसी के अधिकार क्षेत्र से बाहर है और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा है, उसमें जबरदस्ती दखल देना, जगजाहिर है कि यह किस चीज की ओर संकेत करता है।” उन्होंने कहा, “खासकर तब, जब फारूक अब्दुल्ला, महबूबा मुफ्ती और मीरवाइज उमर फारूक जैसे नेता इसमें शामिल हों, जिन्होंने हमेशा अलगाववाद का समर्थन किया और आतंकवाद को संरक्षण दिया है। ऐसे लोग पाकिस्तान के साथ बातचीत की वकालत करें, तो यह बहुत ही अजीब और गंभीर मामला है।”
‘ऑपरेशन सिंदूर’ का जिक्र करते हुए सुनील शर्मा ने कहा, “इस ऑपरेशन में भारतीय सेना का शौर्य और पराक्रम देखा गया। अपनी इस भूमि की रक्षा के लिए वीर जवानों ने जिस तरह प्रदर्शन किया, ऐसे वक्त में बातचीत की वकालत करना ये विवादित दिखाई पड़ता है।”
सुनील शर्मा ने यह भी कहा कि पिछले कुछ वर्षों में जम्मू-कश्मीर में कानून व्यवस्था दृढ़ हो रही है। शांति, रोजगार और समृद्धि के लिए यहां का नौजवान अपेक्षा रख रहा है। इसमें और कैसे सुधार और विस्तार किए जाए, इसके बजाय पाकिस्तान से बातचीत की वकालत करना बहुत ही गंभीर है। इसकी गंभीरता के साथ जांच करने की जरूरत है।
सुनील शर्मा ने यह भी सवाल उठाया कि जो अपने आप को बड़े दिग्गज नेता मानते हैं, उन्होंने कभी नेपाल, भूटान, चीन और म्यांमार जैसे देशों के साथ भारत की बातचीत को लेकर वकालत नहीं की। ये बार-बार पाकिस्तान के साथ बातचीत करने की वकालत करते हैं। उन्होंने कहा, “आप देखेंगे कि जब-जब भारत ने शांति के लिए प्रयास किए हैं, तब-तब पाकिस्तान ने छुरा घोंपने का काम किया है।”
बता दें कि भारत और पाकिस्तान के लगभग 117 लोगों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पड़ोसी मुल्क के पीएम शहबाज शरीफ को संयुक्त रूप से पत्र लिखा है। इन नेताओं में भारत की ओर से फारूक अब्दुल्ला, महबूबा मुफ्ती, मणिशंकर अय्यर, मनोज झा और हुमायूं कबीर जैसे नेता शामिल हैं।

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