जन सामान्य को त्वरित, सस्ता एवं सुलभ न्याय उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शनिवार को लखनऊ में राष्ट्रीय लोक अदालत का व्यापक आयोजन किया गया। पुराना उच्च न्यायालय स्थित मीडियेशन सेंटर में जनपद न्यायाधीश लखनऊ मलखान सिंह की गरिमामयी उपस्थिति में दीप प्रज्ज्वलन एवं मां सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण के साथ राष्ट्रीय लोक अदालत का शुभारम्भ हुआ।

राष्ट्रीय लोक अदालत में जनपद न्यायालय, मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण, पारिवारिक न्यायालय, वाणिज्यिक न्यायालय, उपभोक्ता फोरम, स्थायी लोक अदालत, कलेक्ट्रेट तथा जनपद की समस्त तहसीलों सहित विभिन्न न्यायिक एवं प्रशासनिक संस्थानों में मामलों का निस्तारण किया गया। लोक अदालत में लगभग 2 लाख 95 हजार 708 मामलों का सफलतापूर्वक निस्तारण करते हुए कुल 29 करोड़ 6 लाख 26 हजार 599 रुपये की धनराशि वसूल की गई।
कार्यक्रम में अपर जिला जज कोर्ट संख्या-1 हुसैन अहमद अंसारी, राष्ट्रीय लोक अदालत के नोडल अधिकारी एवं अपर जिला जज श्री प्रकाश तिवारी, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव कुँवर निवेश सिंह कुशवाहा, अपर जिलाधिकारी (न्यायिक) राज बहादुर, बैंक अधिकारियों, लीगल एड डिफेंस काउंसिल के अधिवक्ताओं, पराविधिक स्वयंसेवकों, नामिका अधिवक्ताओं एवं न्यायालय कर्मचारियों सहित बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव द्वारा किया गया।

राष्ट्रीय लोक अदालत के अवसर पर न्यायालय परिसर में वादकारियों की सुविधा के लिए स्वास्थ्य शिविर भी आयोजित किया गया। इसके साथ ही आदर्श कारागार के बंदियों द्वारा निर्मित वस्तुओं की प्रदर्शनी, जन साहस एनजीओ द्वारा आयुष्मान योजना शिविर तथा स्वयंसेवी संस्थाओं द्वारा तैयार उत्पादों की प्रदर्शनी भी लगाई गई। वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट (ODOP) के अंतर्गत लगाए गए स्टॉल का उद्घाटन जनपद न्यायाधीश द्वारा फीता काटकर किया गया।

राष्ट्रीय लोक अदालत का शुभारम्भ करते हुए जनपद न्यायाधीश मलखान सिंह ने अधिक से अधिक मामलों को आपसी सुलह-समझौते के आधार पर निस्तारित करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि लोक अदालतें न्याय को सरल और सुलभ बनाने का प्रभावी माध्यम हैं।
लोक अदालत में न्यायालयों में लंबित मामलों के साथ-साथ प्री-लिटिगेशन स्तर के मामलों का भी बड़े पैमाने पर निस्तारण किया गया। जनपद न्यायालय में विशेष न्यायाधीश ईसी एक्ट द्वारा 156 मामले, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा 4146 मामले, विशेष मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (कस्टम) द्वारा 2102 मामले तथा अन्य न्यायिक मजिस्ट्रेटों द्वारा हजारों मामलों का निस्तारण किया गया। इसके अतिरिक्त मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण के 111 मामले, वाणिज्यिक न्यायालय के 6 मामले, एनआई एक्ट के 1395 मामले तथा पारिवारिक न्यायालय के 134 मामलों सहित कुल 51 हजार 677 लंबित वादों का निस्तारण कर लगभग 18 करोड़ 43 लाख 46 हजार 463 रुपये की धनराशि वसूल की गई।
वहीं प्री-लिटिगेशन स्तर पर राजस्व विभाग के 1 लाख 1 हजार 258 मामले, मुख्य चिकित्सा अधिकारी से संबंधित 1 लाख 22 हजार 752 मामले, बैंक रिकवरी के 1161 मामले, वैवाहिक विवादों के 47 मामले तथा अन्य प्रकरणों सहित कुल 2 लाख 44 हजार 31 मामलों का निस्तारण किया गया। इन मामलों में लगभग 10 करोड़ 62 लाख 80 हजार 136 रुपये की धनराशि की वसूली हुई।
