गोरखपुर / लखनऊ: 06 मई 2026 प्रदेश की योगी सरकार ने बेसिक शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक निर्णय लेते हुए प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत लगभग 1.43 लाख शिक्षामित्रों का मानदेय 10,000 से बढ़ाकर 18,000 रुपए प्रतिमाह कर दिया है। इस निर्णय को सम्मान के साथ लागू करने हेतु मंगलवार को गोरखपुर स्थित योगिराज बाबा गंभीरनाथ प्रेक्षागृह एवं सांस्कृतिक केंद्र में भव्य “शिक्षामित्र सम्मान समारोह” का आयोजन किया गया, जिसका शुभारंभ योगी आदित्यनाथ द्वारा किया गया।
इसी क्रम में मुख्यमंत्री ने बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा लगाए गए उपलब्धि-आधारित स्टॉलों का अवलोकन किया। मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम के दौरान 10 चयनित शिक्षामित्रों को बढ़े हुए मानदेय की प्रतीकात्मक चेक राशि वितरित कर इस निर्णय के क्रियान्वयन की औपचारिक शुरुआत की। विद्यार्थी नेतृत्व आधारित प्रार्थना सभा की अभिनव गतिविधियों पर आधारित ‘अरुणोदय’ कैलेंडर का विमोचन भी किया। इस राज्यस्तरीय कार्यक्रम के समानांतर प्रदेश के सभी जनपदों में भी सम्मान समारोह आयोजित किए गए।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह ने कहा कि गोरखपुर की पावन धरती, जो गुरु गोरक्षनाथ की तपोभूमि रही है, आज शिक्षामित्रों के सम्मान की ऐतिहासिक साक्षी बन रही है। उन्होंने कहा कि भारतीय परंपरा में भगवान शिव को आदिगुरु माना गया है और उसी ज्ञान परंपरा को आज शिक्षामित्र गांव-गांव में आगे बढ़ा रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम केवल एक सम्मान समारोह नहीं, बल्कि शिक्षामित्रों के त्याग, समर्पण और सेवा के प्रति प्रदेश की कृतज्ञता का उत्सव है। उन्होंने बताया कि योगी सरकार ने वर्ष 2017 में मानदेय 3,500 रूपए से बढ़ाकर 10,000 रूपये किया और अब इसे बढ़ाकर 18,000 रूपए प्रतिमाह कर दिया है। यह बढ़ा हुआ मानदेय 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी कर दिया गया है। इसके लिए प्रदेश सरकार द्वारा लगभग 230.11 करोड़ रूपये की धनराशि जनपदों को जारी कर दी गई है, जिससे समयबद्ध भुगतान सुनिश्चित किया जा सके।
मंत्री सिंह ने कहा कि योगी सरकार जो कहती है, उसे पूरा करके दिखाती है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2017 से अब तक बेसिक शिक्षा विभाग में व्यापक और संरचनात्मक सुधार किए गए हैं। “ऑपरेशन कायाकल्प” के तहत विद्यालयों में 19 मानकों पर कार्य करते हुए पेयजल, शौचालय, फर्नीचर, ब्लैकबोर्ड, टाइल्स सहित सभी मूलभूत सुविधाओं को लगभग पूर्ण किया जा चुका है। शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए एनसीईआरटी पाठ्यक्रम को परिषदीय विद्यालयों में लागू किया गया, जिससे निजी और सरकारी विद्यालयों के बीच का शैक्षिक अंतर कम हुआ है। डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देते हुए 31,878 विद्यालयों में स्मार्ट क्लास, 14,988 विद्यालयों में आईसीटी लैब और 1,129 विद्यालयों में डिजिटल लाइब्रेरी स्थापित की गई हैं। शिक्षकों को तकनीक से जोड़ने हेतु 2,61,530 टैबलेट वितरित किए गए हैं।
बालिका शिक्षा को सुदृढ़ करने के लिए कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों को कक्षा 6 से 12 तक विस्तारित किया गया है, जिससे अब बालिकाओं की शिक्षा निरंतर जारी रह सके। इसके साथ ही विद्यार्थियों को यूनिफॉर्म, जूते, मोजे, बैग और स्टेशनरी हेतु 1200 रूपए की डीबीटी सहायता सीधे अभिभावकों के खातों में भेजी जा रही है। “स्कूल चलो अभियान” के तहत 1 अप्रैल से 15 अप्रैल 2026 तक चले विशेष नामांकन अभियान में 20 लाख से अधिक नए विद्यार्थियों का नामांकन किया गया है, जो सरकार की शिक्षा नीति की सफलता का प्रमाण है।
अपने संबोधन में मंत्री संदीप सिंह ने शिक्षामित्रों से आह्वान किया कि वे अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन उसी निष्ठा और समर्पण के साथ करते रहें, क्योंकि वे ही नई पीढ़ी के भविष्य के निर्माता हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री का लक्ष्य उत्तर प्रदेश को “उत्तम प्रदेश” बनाना है और इस लक्ष्य की प्राप्ति में शिक्षामित्रों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने मुख्यमंत्री के प्रति आभार व्यक्त करते हुए शिक्षामित्रों की मांगों को पूरा करने के लिए धन्यवाद ज्ञापित किया गया तथा प्रदेश के समग्र शैक्षिक विकास के लिए सामूहिक प्रयासों को आगे बढ़ाने का संकल्प दोहराया ।
