मुख्यमंत्री का आईजीआरएस सफेद हाथी बनकर रह गया है। वीरेन्द्र मिश्र राष्ट्रीय अध्यक्ष

उत्तर प्रदेश राज्य लखनऊ शहर

लखनऊ अखिल भारतीय पत्रकार एसोसिएशन प्रेस वार्ता लखनऊ, मुख्यमंत्री योगी जी उत्तर प्रदेश में चष्टाचार के विरुद्ध जीरो टालरेन्स की बात करते हैं, नहीं नेताओं और अधिकारियों का काकस मनमाना कर लोगों को जुटने में लगा है। मुख्यमंत्री जी का आईजीआरएस सफेद हाथी बनकर रह गया है। बुलन्दशहर स्याना की एक घटना ने जमीनों की खरीद फरोख्त व भूमि कब्जियाने में कथित भूमाफिया नगर पालिका अध्यक्ष ऋषि पाल सिंह, एसडीएम स्याना रविन्द्र सिंह तथा मण्डलायुक्त मेरठ के एक सहायक के गठजोड़ की पोल खोल दी है। जिला मेरठ मोहिउद्दीनपुर थाना परतापुर निवासी रविकांत कौशिक की पत्नी अनिता ने, तहसील/बाना स्याना अन्तर्गत खसरा संख्या 2650 में से 675 वर्ग मीटर प्लाट की रजिस्ट्री ऋषि पाल सिंह की सहमति तथा प्लाट पर कोई विवाद नहीं है कहने पर कराई थी, बाद में पता चला कि उक्त प्लाट पर ऋषि पाल सिंह जबरन कब्जा किये हुए थे। अनिता ने नगर निगम में रजिस्ट्री के आधार पर दाखिल खारिज का आवेदन किया तो ऋषिपाल ने अपने अधिकार का दुरुपयोग कर, दाखिल खारिज रुकवा दिया। पीड़िता को इंसाफ दिलाने तथा रजिस्ट्री शुदा प्लाट पर नियमानुसार कब्जा दिलाने के लिए 22.12.2025 को मैंने मुख्यमंत्री, जिलाधिकारी तथा एस एस पी बुलन्दशहर को पत्र लिखा। एस.ओ. स्याना ने ऋषिपाल से उक्त प्लाट के कागज मांगे तो कई दिन तक टरकाने के बाद जो कागज दिया वह तहसीलदार की जांच में फर्जी निकला। जिलाधिकारी ने इसी प्रकरण की जांच एसडीएम स्थान को सौंपा। एसडीएम स्याना ने 22.01. 2026 को पीडीम को बुलाया, निर्धारित तिथि पर पीड़िता के पहुंचने पर, यह कहकर भगा दिया कि तुमने करोड़ों की जमीन लाखों में खरीदी है। मैं आपकी कोई सहायता नहीं कर सकता आप कोर्ट से आदेश लेकर आइये हम तभी आपकी मदद कर सकते हैं। पुनः मैंने एसडीएम की शिकायत संजय प्रसाद अपर मुख्य सचिव मुख्यमंत्री को 30.01.2026 पत्र लिखकर की, इसमें तहसीलदार ने लिखा, यह भूमि संक्रमणीय है, जो अनिता कौशिक के नाम दाखिल खारिज नहीं है। पीड़िता मंप्लायुक्त मेरठ से मिलने गयी वहां मंडलायुक्त तो नहीं मिले. उनके एक सहायक ने भी एसडीएम की बात दोहराते हुए कहा कि आप लोगों ने करोड़ों जमीन लाखों में खरीदा है. अब कब्जा लेने के लिए दबाव बनवा रहे हो। ज्यादा चालाकी की या मंत्रियों से ज्यादा सिफारिश की तो तुम्हारा काम फंसा देंगे फिर कभी नहींहो पायेगा। तुम चाहो तो एसडीएम से बात कर तुम्हारा समझौता करवा दूंगा। ऐसा प्रतीत होता है कि ऋषि पाल सिंह, एसडीएम स्याना तथा मंडलायुक्त मेरठ के कथित सहायक बड़े पैमाने पर जमीनों की खरीद फरोख्त में लोगों से वसूली कर रहे हैं। इन अधिकारियों तथा ऋषि पाल सिंह के चल अचल सम्पत्ति की जांच होनी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट के एक आदेशानुसार जिसके पास रजिस्ट्री है वही असली मालिक है। अनिता को प्लाट पर कब्जा दिलाने में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश का पालन किया जाना चाहिए।

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