लखनऊ। भारत के महान संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती के अवसर पर पसमांदा मुस्लिम समाज के राष्ट्रीय कार्यालय में एक अत्यंत भावुक और विचारोत्तेजक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर पसमांदा मुस्लिम समाज के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मंत्री अनीस मंसूरी ने डॉ. अंबेडकर के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किए।
अपने संबोधन में अनीस मंसूरी ने कहा कि डॉ. अंबेडकर का जीवन केवल एक व्यक्ति की कहानी नहीं, बल्कि उन करोड़ों वंचित, शोषित और उपेक्षित लोगों की आवाज़ है, जिन्हें उन्होंने अधिकार और सम्मान दिलाने का काम किया।
उन्होंने भावुक शब्दों में कहा, “अगर बाबा साहेब न होते, तो शायद आज समाज के अंतिम पायदान पर खड़े लोगों को इंसाफ और बराबरी का एहसास भी न होता।”
उन्होंने आगे कहा, “सच्चाई तो यह है कि बाबा साहब भारत के पसमांदा मुसलमानों के भी सच्चे रहबर थे। उनके विचारों में वह ताक़त थी, जो हर वंचित तबके को हक़ और इज़्ज़त के साथ जीने की राह दिखाती है।”
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पसमांदा समाज की लड़ाई दरअसल उसी सोच की निरंतरता है, जो समानता, शिक्षा और आत्मसम्मान पर आधारित है।
डॉ. अंबेडकर के सिद्धांत आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं, जितने उनके समय में थे।
कार्यक्रम में उपस्थित लोगों की आंखें उस वक्त नम हो गईं, जब वक्ताओं ने बाबा साहेब के संघर्षों और त्याग को याद करते हुए उनके बताए रास्ते पर चलने का संकल्प लिया। माहौल पूरी तरह से सम्मान, संवेदना और प्रेरणा से भरा हुआ था।
अंत में सभी उपस्थित लोगों ने यह संकल्प लिया कि वे डॉ. अंबेडकर के विचारों को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने और सामाजिक न्याय की स्थापना के लिए निरंतर प्रयासरत रहेंगे।
इस अवसर पर मुख्य रूप से ऐजाज़ अहमद राईन संगठनमंत्री, मोहम्मद रिज़वान ( पप्पू कुरैशी ) ऐजाज़ अहमद एडवोकेट, नरेंद्र सिंह यादव, मोहम्मद कलीम ( गुड्डू ), फैसल सिद्दीकी, इमरान मिर्ज़ा, करीम मंसूरी, जय प्रकाश शुक्ला, रामप्रकाश मौर्या, अनिल कश्यप आदि मौजूद रहे।
