ड्रामा संग्रह “कांच पर चलते लोग” का भव्य लोकार्पण साहित्य और रंगमंच का अनूठा संगम

उत्तर प्रदेश देश राज्य लखनऊ शहर

लखनऊ। रूबरू फाउंडेशन के तत्वावधान में बहुप्रतीक्षित ड्रामा संग्रह “कांच पर चलते लोग” का भव्य लोकार्पण हिंदी संस्थान, हज़रतगंज में गरिमामय एवं सांस्कृतिक वातावरण के बीच संपन्न हुआ। कार्यक्रम ने साहित्य, रंगमंच और समकालीन चिंतन का एक सुंदर संगम प्रस्तुत किया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता पद्मश्री डॉ. अनिल कुमार रस्तोगी ने की। अपने उद्बोधन में उन्होंने पुस्तक की संवेदनात्मक गहराई, सामाजिक सरोकारों और समकालीन यथार्थ से उसके गहरे जुड़ाव पर विस्तार से प्रकाश डाला।

मुख्य अतिथि माननीय जज जूही कुद्दूसी ने लेखक, कवि एवं शायर इरशाद राही की रचनात्मक दृष्टि की सराहना करते हुए कहा कि यह कृति समाज के उन अनदेखे पहलुओं को उजागर करती है, जिन्हें अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है। विशिष्ट अतिथि, वरिष्ठ रंगकर्मी एवं पूर्व निदेशक दूरदर्शन श्री सुशील कुमार सिंह ने कहा कि यह पुस्तक साहित्य और रंगमंच के बीच एक सशक्त सेतु का कार्य करती है।

इस अवसर पर सुश्री रूही रहमान, सुश्री चित्र मोहन, श्री पी. अनिल गुरुजी, श्री ललित पोखरिया, श्री राकेश वेद, श्री सूर्य मोहन कुलश्रेष्ठ, सुश्री अचला बस एवं श्री प्रभात बोस सहित कई वक्ताओं ने अपने विचार व्यक्त करते हुए पुस्तक की प्रासंगिकता और प्रभावशीलता पर प्रकाश डाला।

कार्यक्रम का शुभारंभ पारंपरिक दीप प्रज्वलन से हुआ, जिसके पश्चात सूफियाना ग्रुप डांस ने माहौल को सांस्कृतिक रंगों से सराबोर कर दिया। इसके बाद पुस्तक का औपचारिक विमोचन किया गया तथा कृति के एक अंश पर आधारित लघु फिल्म का प्रदर्शन किया गया, जिसका निर्देशन नईम खान ने किया।

समारोह के दौरान विभिन्न शिक्षण संस्थानों—इस्लामिया डिग्री कॉलेज, खुन-खुन डिग्री कॉलेज, महिला डिग्री कॉलेज, करामत डिग्री कॉलेज एवं कालीचरण डिग्री कॉलेज—के विद्यार्थियों द्वारा “डिजिटल युग में रंगमंच का महत्व” विषय पर आयोजित निबंध प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को ट्रॉफी एवं प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम में शायरों और कवियों की भावपूर्ण प्रस्तुतियों ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया, वहीं विविध सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने आयोजन को और भी जीवंत बना दिया।

इससे पूर्व संस्था के सचिव मोहम्मद अजहर हुसैन ने रूबरू फाउंडेशन की गतिविधियों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि संस्था हिंदी-उर्दू के रचनाकारों को एक साझा और सशक्त मंच प्रदान कर रही है।

अंत में डॉ. वी.बी. पांडे ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। कार्यक्रम के पश्चात अतिथियों के लिए जलपान की भी व्यवस्था की गई।

इस अवसर पर संयोजक डॉ. मसीहुद्दीन खान, सह-संयोजक नेहा परवीन, कोऑर्डिनेटर डॉ. तबस्सुम खान, स्वागत समिति के अध्यक्ष नयर बिसवानी, उपाध्यक्ष डॉ. वी.बी. पांडे, डॉ. मोहम्मद साद सिद्दीकी, शकील अहमद, मोहम्मद आसिफ, मोहम्मद इम्तियाज, मोहम्मद हारिस, अदीबा हुसैन, आसमा हुसैन, सुबुर हसन एवं अनम हुसैन सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

यह आयोजन साहित्य और रंगमंच प्रेमियों के लिए एक यादगार अनुभव साबित हुआ।

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