पिछड़ा वर्ग (OBC) के संवैधानिक अधिकारी, सामाजिक न्याय और समुचित प्रतिनिधित्व को सुनिश्चित करने हेतु निम्नलिखित प्रमुख मार्ग एवं मुद्दे प्रस्तुत किए जाते हैं।
1. पर्याप्त राजनीतिक प्रतिनिधित्व
पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए लोकसभा एवं विधानसभाओं में राजनीतिक आरक्षण लागू किया जाए।
जनसंख्या के अनुपात में 52% प्रतिनिधित्व और नौकरी में आरक्षण सुनिश्चित किया जाए।

2. आरक्षण का पूर्ण क्रियान्वयन
27% पिछड़ा वर्ग (OBC) आरक्षण का सभी सरकारी नौकरियाँ एवं शैक्षणिक संस्थानों में पूर्ण पालन किया जाए।
आरक्षण को कमजोर करने वाली प्रवत्तियों पर रोक लगे।
क्रीमी लेयर की सीमा एवं निर्धारण को पुनः समीक्षा कर न्यायसंगत बनाया जाए।
निजी क्षेत्र एवं न्यायपालिका में SC/OBC आरक्षण लागू किया जाए।
4. जातिगत जनगणना (Caste Census )
पिछड़ा वर्ग (OBC) की वास्तविक जनसंख्या के सटीक आंकड़ों हेतु जातिगत जनगणना कराई
जाए।
डेटा आधारित नीतियों के निर्माण से समान अवसर सुनिश्चित किए जाएं।
5. आर्थिक सशक्तिकरण
पिछड़ा वर्ग (OBC) की स्पेशल इकोनॉमिक जोन (SEZ) में भागीदारी सुनिश्चित की जाए।
कृषि एवं असंगठित क्षेत्र पर निर्भर वर्ग के लिए विशेष आर्थिक पैकेज
स्वरोजगार, स्टार्टअप एवं उद्योग हेतु आसान ऋण एवं वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाए।
6. सामाजिक भेदभाव का उन्मूलन
पिछड़ा वर्ग (OBC) के खिलाफ सामाजिक भेदभाव एवं उपेक्षा पर सख्त कार्रवाई।
7. संस्थागत भागीदारी
उच्च प्रशासनिक सेवाओं, न्यायपालिका एवं विश्वविद्यालयों में पिछड़ा वर्ग (OBC) की भागीदारी बढ़ाई जाए। निर्णय लेने वाले पदों पर प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जाए।
8. उच्च स्तर पर प्रतिनिधित्व
प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) एवं नीति आयोग में पिछड़ा वर्ग (OBC) एवं SC वर्ग का समुचित प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जाए।
9. पिछड़े वर्ग (OBC) की नौतियों का प्रभावी क्रियान्वयन
आरक्षण एवं सरकारी योजनाओं का जमीनी स्तर पर सख्ती से पालन हो।
इसके लिए स्वतंत्र निगरानी तंत्र (Monitoring Mechanism) की स्थापना की जाए।
10. उपरोक्त सभी क्षेत्रों में अति पिछड़ी जातियों (OBC) को 15% अतिरिक्त आरक्षण दिया जाना चाहिए।
11. मंडल कमीशन रिपोर्ट के अनुसार पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए लागू 27% आरक्षण के अनुसार अब तक का बैकलॉग भरा जाना चाहिए।
