नई दिल्ली : देश में बढ़ते बैंक फ्रॉड के खिलाफ कार्रवाई को लेकर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लोकसभा में बड़ा अपडेट दिया है. उन्होंने बताया कि प्रवर्तन निदेशालय ने मनी लॉन्ड्रिंग कानून के तहत अब तक 1,105 बैंक धोखाधड़ी मामलों की जांच की है और 64,920 करोड़ रुपये की अपराध से जुड़ी संपत्तियां अटैच की हैं. यह कार्रवाई उन मामलों में की गई है, जहां बैंकों के पैसे की हेराफेरी कर उसे छुपाने या बाहर ले जाने की कोशिश की गई थी.
वित्त मंत्री ने यह जानकारी दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता में संशोधन से जुड़े बिल पर चर्चा के दौरान दी. उन्होंने साफ किया कि सरकार सिर्फ जांच तक सीमित नहीं है, बल्कि आरोपियों के खिलाफ गिरफ्तारी, संपत्ति जब्ती और कानूनी कार्रवाई एक साथ आगे बढ़ रही है ताकि बैंकों का पैसा वापस लाया जा सके.
जांच, गिरफ्तारी और केस दर्ज करने में तेजी
सरकार के आंकड़ों के मुताबिक इन मामलों में अब तक 150 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है. इसके अलावा 277 अभियोजन शिकायतें दर्ज की गई हैं, जिससे केस को अदालत में आगे बढ़ाया जा सके. कई आरोपियों को फ्यूजिटिव इकोनॉमिक ऑफेंडर भी घोषित किया गया है, यानी वे लोग जो देश छोड़कर बाहर चले गए और भारतीय कानून से बचने की कोशिश कर रहे हैं.
बड़े नामों पर भी शिकंजा
कार्रवाई सिर्फ छोटे मामलों तक सीमित नहीं है. नीरव मोदी और विजय माल्या जैसे बड़े मामलों में भी एजेंसियों ने संपत्तियां जब्त की हैं. इन मामलों में बैंकों को भारी नुकसान हुआ था और आरोपी विदेश में रह रहे हैं. ऐसे मामलों में फ्यूजिटिव इकोनॉमिक ऑफेंडर्स कानून के तहत कार्रवाई की जा रही है, जिससे उनकी संपत्ति जब्त कर रिकवरी की जा सके.
बैंकों को कितना पैसा वापस मिला
वित्त मंत्री के मुताबिक अब तक 15,186 करोड़ रुपये की संपत्ति को जब्त कर लिया गया है. इसमें से करीब 15,183 करोड़ रुपये सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को वापस भी किए जा चुके हैं. इससे साफ है कि जांच एजेंसियों की कार्रवाई सिर्फ कागजों तक सीमित नहीं है, बल्कि उससे बैंकों को असली राहत भी मिल रही है.
PMC बैंक घोटाले का जिक्र
पंजाब एंड महाराष्ट्र कोऑपरेटिव बैंक घोटाले का भी संसद में जिक्र हुआ. 2019 में सामने आए इस मामले में बैंक ने अपने कुल कर्ज का बड़ा हिस्सा एक ही ग्रुप को दे दिया था और खराब लोन को छुपाया गया था. इस घोटाले में अब तक 104 करोड़ रुपये की रिकवरी की जा चुकी है और 725 करोड़ रुपये की संपत्तियां जब्त की गई हैं. बाद में बैंक के संकट को संभालने के लिए उसे यूनिटी स्मॉल फाइनेंस बैंक के साथ मर्ज किया गया, जिससे जमाकर्ताओं को धीरे धीरे पैसा वापस मिल सके.
कानून के जरिए कड़ी कार्रवाई
सरकार ने यह भी साफ किया कि मनी लॉन्ड्रिंग कानून और फ्यूजिटिव इकोनॉमिक ऑफेंडर्स एक्ट के जरिए ऐसे मामलों में लगातार सख्ती बढ़ाई जा रही है. इसमें अपराध से जुड़ी संपत्ति, बेनामी संपत्ति और विदेश में छिपाए गए एसेट्स तक को निशाना बनाया जा रहा है, ताकि किसी भी आरोपी को सिस्टम से बाहर जाकर बचने का मौका न मिले.
