जंग के बीच बोला ईरान, कहा-ट्रंप ने हमे दिया धोखा! अमेरिका के लिए नहीं बचा अब कोई भी रास्ता

विदेश

नई दिल्ली : मिडिल ईस्ट में तेज होती जंग के बीच ईरान ने अमेरिका के साथ बातचीत खत्म करने का ऐलान कर दिया है. ईरान का कहना है कि अमेरिका धोखेबाज है जिसने भरोसे को कई बार तोड़ा है. ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने कहा कि अमेरिका ने बार-बार कहा कि कोई सैन्य कार्रवाई नहीं होगी, बावजूद इसके उसने हमला किया और ईरान के भरोसे को चकनाचूर कर दिया.

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर जारी एक वीडियो में अरागची ने कहा, ‘अमेरिका के साथ बातचीत हमेशा के लिए खत्म हो गई है… उनके साथ हमारा अनुभव बेहद कड़वा रहा है और हमें धोखा मिला है. हमसे वादा किया गया कि हमला नहीं होगा लेकिन हम पर हमले किया गया.’

उन्होंने आगे कहा कि हालिया हमलों ने ईरान और अमेरिका के बीच बची हुई कूटनीतिक गुंजाइश को भी खत्म कर दिया है. उन्होंने कहा, ‘हमने पिछले साल जून में उनके (अमेरिका के) साथ बातचीत की थी, लेकिन उन्होंने बातचीत के बीच में ही हम पर हमला कर दिया. फिर इस साल उन्होंने हमसे यह कहा कि इस बार हालात अलग हैं. उन्होंने वादा किया कि वो हम पर हमला नहीं करेंगे और ईरान के परमाणु मुद्दे को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाना चाहते हैं, ताकि कोई समझौता किया जा सके.’

अब्बास अरागची ने आगे कहा, ‘हमने आखिरकार उनकी बात मान ली, लेकिन तीन दौर की बातचीत के बाद, जब उनकी ही टीम कह रही थी कि बातचीत काफी अच्छी जा रही है, तभी उन्होंने हम पर हमले शुरू कर दिए.’

वीडियो के अंत में अरागची ने कहा, ‘अब अमेरिका के साथ बातचीत की कोई गुंजाइश नहीं बची है. यह अब हमारे एजेंडे में नहीं है.’

चौथे हफ्ते में पहुंची ईरान जंग

ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजरायल की जंग अब चौथे हफ्ते में पहुंच चुकी है. दोनों पक्ष एक-दूसरे पर ताबड़तोड़ हमले कर रहे हैं. ईरान ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका उसके बिजली संयंत्रों पर हमला करता है, तो वह होर्मुज स्ट्रेट को पूरी तरह बंद कर सकता है. यह समुद्री मार्ग दुनिया की करीब 20% तेल आपूर्ति संभालता है, इसलिए बेहद अहम है.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी चेतावनी दी है कि अगर ईरान स्ट्रेट नहीं खोलता, तो उसके बिजली ढांचे पर हमले किए जा सकते हैं, जिससे तनाव और बढ़ गया है.

ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकर गालिबाफ ने कहा कि अगर ऐसा होता है तो ईरान क्षेत्र में अमेरिका के सहयोगी देशों के ऊर्जा और पानी के ठिकानों पर हमले बढ़ा देगा.

संयुक्त राष्ट्र में ईरान के राजदूत ने भी चेतावनी दी कि बिजली संयंत्रों पर हमला युद्ध अपराध माना जा सकता है, क्योंकि यह अंधाधुंध और असंतुलित कार्रवाई होगी.

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