कोलकाता, अनूप कुमार। चुनाव तो पांच राज्यों केरल, तमिलनाडु, पुडुचेरी, असम व बंगाल में हो रहें हैं, लेकिन देशभर में चर्चा है तो बंगाल के नंदीग्राम की। क्या नंदीग्राम एक बार फिर बंगाल की सियासत में बड़े बदलाव का गवाह बनने जा रहा है? यह जानने के लिए यहां के मतदाताओं का मूड भांपना उतना आसान तो नहीं है, लेकिन चौक-चौराहों से लेकर दूर-सुदूर गांवों तक फागुनी बयार के साथ ‘जय श्रीराम’ के उद्घोष काफी कुछ कहानी बयां कर दे रहे हैं। यहां दीदी (ममता बनर्जी) को कभी उनके ही सबसे बड़े सेनापति रहे दादा (सुवेंदु अधिकारी) कड़ी टक्कर दे रहे हैं और इसकी गूंज पूरे बंगाल में ही नहीं, बल्कि देशभर में सुनी जा रही है।
बंगाल के पूर्व मेदिनीपुर जिले का नंदीग्राम आज से ठीक 14 साल पहले 14 मार्च, 2007 को देश ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में चर्चा का विषय बना था। यहां केमिकल फैक्ट्री के लिए जमीन अधिग्रहण किए जाने के खिलाफ पहले लोगों को भड़काया गया और फिर इस पर जमकर राजनीति हुई। 14 लोग पुलिस की गोली के शिकार बने थे। इसके बाद ममता बनर्जी ने सुवेंदु अधिकारी के साथ मिलकर ऐसा राजनीतिक बवंडर खड़ा किया था कि बंगाल की सत्ता पर काबिज वाम दल को बेदखल होना पड़ा। ममता मुख्यमंत्री बनीं और सुवेंदु उनके प्रमुख सेनापति। 14 मार्च, 2007 को मारे गए अपने 14 लोगों को नंदीग्राम हर साल नंदीग्राम दिवस के उपलक्ष्य में याद करता है। इस बार भी करेगा, लेकिन अब 14 साल बाद यहां की राजनीतिक परिस्थितियां करवट ले रहीं हैं।