प्रत्येक वर्ष की भांति इस वर्ष भी श्री श्री राधा रमण बिहारी मंदिर (इस्कॉन) सुशांत गोल्फ सिटी, लखनऊ में 03 मार्च 2026 दिन मंगलवार को सायं 07:00 बजे से श्री चैतन्य महाप्रभु जी का प्राकट्य दिवस (गौर पूर्णिमा) महा महोत्सव का भव्य आयोजन किया गया l
कार्यक्रम का शुभारम्भ इस्कॉन, लखनऊ के आदरणीय अध्यक्ष श्रीमान अपरिमेय श्याम प्रभु जी द्वारा श्री चैतन्य महाप्रभु का अभिषेक एवं पूजन अर्चन करके किया गया, जिसके बाद क्रमानुसार अन्य सभी कार्यक्रम संपन्न हुए गौर कथा के साथ ही भगवान का भजन, कीर्तन एवं नृत्य आदि करते हुए सभी भक्तों ने बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाया l
गौर कथा में मंदिर के अध्यक्ष श्रीमान अपरिमेय श्याम प्रभु जी ने बताया कि चैतन्य महाप्रभु 15वीं शताब्दी के एक महान संत और गौड़ीय वैष्णव परम्परा के संस्थापक थे, जो भगवान श्रीकृष्ण के सभी अवतारों में अत्यन्त दयालु अवतार है, चैतन्य महाप्रभु जी ने हरिनाम संकीर्तन और भक्ति आंदोलन के माध्यम से जाति-पांति रहित समाज, प्रेम और भक्ति का संदेश दिया l
चैतन्य महाप्रभु जी ने कलांतर में वृन्दावन धाम में विलुप्त हो चुकी भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं के महान दिव्य स्थलों का पुनरोद्धार अपने छ: शिष्यों क्रमशः श्रील गोपाल भट्ट गोस्वामी, श्रील रघुनाथ भट्ट गोस्वामी, श्रील रूप गोस्वामी, श्रील सनातन गोस्वामी, श्रील जीव गोस्वामी एवं श्रील रघुनाथ दास गोस्वामी द्वारा कराया गया l
चैतन्य महाप्रभु का जन्म: 18 फरवरी 1486 को पश्चिम बंगाल के नादिया (मायापुर) में हुआ। बचपन का नाम ‘निमाई’ एवं ‘गौरंगा’ था। इनके पिता श्री जगन्नाथ मिश्र और माता श्रीमती शची देवी थी l चैतन्य महाप्रभु जी महान वैष्णव एवं संत परम पूज्य ईश्वरपुरी जी से से भेंट करने के बाद कृष्ण भक्ति में लीन हो गए और 24 वर्ष की आयु में परम पूज्य केशव भारती जी से संन्यास की दीक्षा ली, उन्होंने मृदंग और करताल के साथ ‘हरे कृष्ण महामंत्र का सामूहिक संकीर्तन शुरू किया, इन्होंने गौड़ीय वैष्णव संप्रदाय की स्थापना की तथा सगुण भक्ति और ईश्वर के प्रति निःस्वार्थ प्रेम को महत्व दिया।
श्री कृष्णदास कविराज द्वारा रचित ‘चैतन्य चरितामृत’ और वृंदावन दास ठाकुर का ‘चैतन्य भागवत’ चैतन्य महाप्रभु जी से सम्बन्धित प्रमुख ग्रन्थ हैं।
चैतन्य महाप्रभु जी ने अपने जीवन के अंतिम वर्ष पुरी धाम (ओडिशा प्रान्त) में व्यतीत किए और वहीं उन्होंने महाप्रयाण किया।
अंत में श्रीमान अपरिमेय श्याम प्रभु जी ने सभी लोगों से अधिक से अधिक हरे कृष्ण महामंत्र एवं गीता का स्वाध्याय करने के लिए कहा जिससे समस्त जनमानस का कल्याण होगा l साथ ही साथ वृन्दावन धाम मे छठ गोस्वामियों द्वारा पुनरोद्धार किये गये सप्त देवालयों (मन्दिर) क्रमशः गोविंद देव जी, गोपीनाथ जी, मदन मोहन जी, राधा रमण जी, राधा दामोदर जी, राधा श्याम सुंदर जी, एवं गोकुलानंद जी के दर्शनों का अनुरोध किया
कार्यक्रम की समाप्ति पर सभी उपस्थित भक्तों ने स्वादिष्ट एकादशी प्रसादम (भंडारा) का आंनद लिया l
