लखनऊ। खराब खानपान और भागदौड़ भरी जिंदगी के कारण डायबिटीज, मोटापा और हाई ब्लड प्रेशर के मरीज तेजी से बढ़ रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि ये तीनों बीमारियां मिलकर दिल की बीमारी का खतरा कई गुना बढ़ा देती हैं। लापरवाही बरतने पर हार्ट अटैक और स्ट्रोक जैसी गंभीर समस्या हो सकती है। यह जानकारी लारी कॉर्डियोलॉजी विभाग के अध्यक्ष डॉ. ऋषि सेट्ठी ने दी।

वह शुक्रवार को केजीएमयू के अटल बिहारी वाजपेई साइंटिफिक कन्वेंशन सेंटर में आयोजित कॉर्डिकॉन 2026 को संबोधित कर रहे थे। कॉर्डियोलॉजी सोसाइटी ऑफ इंडिया की ओर से कान्फ्रेंस हो रही है। विभागाध्यक्ष डॉ. ऋषि सेट्ठी ने कहा कि डायबिटीज होने पर खून में शुगर की मात्रा बढ़ जाती है, जिससे नसों को नुकसान पहुंचता है। इससे दिल तक खून पहुंचाने वाली धमनियों में रुकावट का खतरा बढ़ जाता है। वहीं मोटापा, खासकर पेट पर चर्बी बढ़ना, दिल के लिए खतरनाक है। इससे शरीर में खराब कोलेस्ट्रॉल बढ़ता है। दिल पर दबाव पड़ता है। हाई ब्लड प्रेशर को साइलेंट किलर कहा जाता है। लंबे समय तक बीपी बढ़ा रहने से दिल की मांसपेशियां कमजोर हो सकती हैं। अगर किसी व्यक्ति को डायबिटीज के साथ बीपी या मोटापा भी है तो उसे दिल की बीमारी होने की आशंका और ज्यादा रहती है।
कॉर्डियोलॉजी सोसाइटी ऑफ इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. धीमान कहाली ने कहा कि दिल की बीमारी से बचने के लिए मोटापा से बचें। नियमित कसरत करें। मीठी व नमक का सेवन कम करें। फास्ट फूड व डिब्बा बंद भोजन भी दिल की सेहत के लिए खतरा है। डॉ. अक्षय प्रधान ने कहा कि 30 साल की उम्र के बाद नियमित रूप से ब्लड शुगर, बीपी और कोलेस्ट्रॉल की जांच करानी चाहिए। रोजाना कम से कम आधा घंटा टहलना, संतुलित भोजन करना, नमक और तले-भुने खाने से परहेज, धूम्रपान से दूरी और वजन नियंत्रित रखना जरूरी है। समय पर जांच और इलाज से दिल को सुरक्षित रखा जा सकता है।
इस प्रेस वार्ता में डॉ. मोनिका, डॉ. अभिषेक, डॉ. आयुष शुक्ला तथा डॉ. उमेश त्रिपाठी भी विशेष रूप से उपस्थित रहे।
