अमेरिका और ईरान के बीच प्रस्तावित वार्ता में पाकिस्तान को भी न्यौता, कई मुस्लिम और अरब देशों भी होंगे शामिल

विदेश

नई दिल्ली : अमेरिका और ईरान के बीच प्रस्तावित वार्ता में तुर्की के अलावा एक और मुस्लिम देश को विशेष तौर पर शामिल गिया गया है. ये देश है. पाकिस्तान. अमेरिका के कहने पर इस शांतिवार्ता में उसे अहम भूमिका दी गई है. अमेरिकी मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक यह बातचीत इस सप्ताह तुर्की के इस्तांबुल में होने की तैयारी है, जिसमें पाकिस्तान सहित कई मुस्लिम और अरब देशों को आमंत्रित किया गया है.

ऐसी इंटरनेशनल डिप्लोमेटिक वार्ता में पाकिस्तान को न्यौता मिलना

सूत्रों के मुताबिक अमेरिका के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची इस वार्ता में शामिल होंगे. रिपोर्ट में कहा गया है कि इस पूरी बातचीत की अगुवाई तुर्की कर रहा है, जबकि कतर और मिस्र इसका समर्थन कर रहे हैं. पाकिस्तान को इसमें शामिल किया जाना इस बात का संकेत है कि अमेरिका अब उसे केवल क्षेत्रीय नहीं, बल्कि वैश्विक कूटनीतिक प्रक्रिया का हिस्सा मान रहा है.

वार्ता में कितने मुस्लिम देश शामिल?
अमेरिका-ईरान के बीच होने वाली वार्ता में कई देशों को मध्यस्थता का न्यौता दिया गया है. वार्ता तुर्की के इस्तांबुल शहर में हो रही है. इसमें जिन मुस्लिम देशों को न्यौता दिया गया है, उनमें शामिल हैं –

पाकिस्तान
सऊदी अरब
कतर
संयुक्त अरब अमीरात
मिस्र
ओमान

विदेश मंत्री भी मौजूद रह सकते हैं. बातचीत का मुख्य एजेंडा ईरान के परमाणु कार्यक्रम और मिसाइल क्षमताओं पर अमेरिका की चिंताओं को लेकर होगा. ईरान ने भी संकेत दिए हैं कि वह अमेरिका के साथ बातचीत के लिए तैयार है. ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने परमाणु मुद्दे पर वार्ता शुरू करने के निर्देश दिए हैं. ईरान का कहना है कि अगर लक्ष्य परमाणु हथियारों से मुक्त रहना है, तो समझौता संभव है, बशर्ते बदले में प्रतिबंध हटाए जाएं.

पाकिस्तान को अमेरिका ने दिया मौका
पाकिस्तान पहली बार किसी अंतरराष्ट्रीय डिप्लोमेटिक मंच पर अपनी भूमिका निभाने जा रहा है. इससे उसे वैश्विक स्तर पर लाभ मिलेगा. खासतौर पर जब वो अमेरिका जैसे बड़े देश के पक्ष वाले नेगोसिएशन का हिस्सा बन रहा है, तो सऊदी, कतर, तुर्की जैसे देशों की लाइन में खड़ा हो रहा है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि अगर समझौता नहीं हुआ तो बुरे नतीजे हो सकते हैं, हालांकि उन्होंने बातचीत के जरिए समाधान की उम्मीद भी जताई है. पाकिस्तान की यहां मौजूदगी यह दिखाती है कि उसे अमेरिका ने क्षेत्रीय स्थिरता और संवाद के लिए एक उपयोगी साझेदार के रूप में स्वीकार किया है. ऐसे समय में जब ईरान संकट अंतरराष्ट्रीय चिंता बना हुआ है, पाकिस्तान की यह भूमिका उसकी कूटनीतिक स्थिति को मजबूत कर सकती हैं.

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