लखनऊ 27 जनवरी राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद ने केंद्रीय बजट 2026-27 में कर्मचारियों पेंशनर्स से जुड़ी महत्वपूर्ण मांगों को शामिल किए जाने की जोरदार मांग की है। परिषद के अध्यक्ष जे एन तिवारी ने कहा कि देश के 48 लाख कर्मचारी एवं 56 लाख से अधिक पेंशनर्स आज भी कर पेंशन और वेतन असमानताओं से जूझ रहे हैं। देश में करदाताओं में सबसे अधिक प्रतिशत सरकारी कर्मचारी एवं पेंशनर्स की है, फिर भी उनके लिए बजट राहत की खबर लेकर नहीं आता है। परिषद ने आयकर में व्यापक सुधार किए जाने, 5 लाख तक कर मुक्त आय, पेंशन को पूर्णता टैक्स फ्री किए जाने, ओपीएस में जाने का विकल्प खोले जाने, आठवें वेतन आयोग को 1 जनवरी 2026 से लागू किए जाने ,50% महंगाई भत्ते का तत्काल मर्जर किए जाने, जिन संविदा कर्मियों की नियमित पदों के सापेक्ष चयन समिति के माध्यम से चयनित किया गया हैं तथा उनको सातवें वेतन आयोग का लाभ प्राप्त हो रहा हैं उनको नियमित किए जाने, कोविद कल का 18% दिए जारी करने तथा कर्मचारियों के लिए 10 लाख स्वास्थ्य बीमा की मांग किया है। जे एन तिवारी ने कहा कि कर्मचारियों के हाथ में पैसा होगा तो बाजार चलेगा, निवेश बढ़ेगा और अर्थव्यवस्था मजबूत होगी। विकसित भारत 2047 का सपना कर्मचारियों को सशक्त किए बिना पूरा नहीं हो सकता। संयुक्त परिषद की महामंत्री अरुणा शुक्ला ने कहा है कि बजट को स्त्रियों के सम्मान एवं सशक्तिकरण के अनुरूप बनाया जाना चाहिए। बजट श्रमिक, महिला, युवा गरीब, किसान, समाज के वंचित लोगों की आत्मा होता है ।बजट लोक कल्याण पर केंद्रित होना चाहिए। संयुक्त परिषद के अध्यक्ष जे एन तिवारी ने सरकार से अपील किया है कि बजट को केवल आंकड़ों का दस्तावेज न बनाकर लोक कल्याण का माध्यम बनाया जाए।
