मणिकर्णिका घाट के जीर्णोद्धार और सुंदरीकरण के कार्य पर अनावश्यक प्रश्न खड़ा करके उसकी आड़ में कांग्रेस और समाजवादी पार्टी गंदी राजनीति कर रहे हैं। इस प्रकार शायद ये लोग सनातन धर्मस्थानों के प्रति अनदेखी और उपेक्षा करने का अपना दशकों पुराना पाप धोना चाहते हैं।
सबसे पहले इन्हें ये बताना चाहिए कि यूपी में सपा की चार बार की सरकार सहित विपक्ष के 65-70 साल के शासनकाल में सनातन संस्कृति, उसके उत्सवों, देवस्थानों और तीर्थस्थानों के लिए किया क्या गया।
उत्तर प्रदेश के ही अनुभव से यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी कि मुगलों और अंग्रेजों से ज़्यादा नुकसान कांग्रेस और सपा के शासनकाल में सनातन की धरोहरों और परंपराओं का हुआ है। जो था उसे गिरने-ढहने दिया गया। और जो गिर गया उस पर वोट बैंक की राजनीति के लिए बलात् कब्जा करवाया गया।
कुछ दिन पहले एक बड़े नेता ने कहा था कि उन्होंने हाल में दिल्ली से हैदराबाद की हवाई यात्रा किया। वो इंदिरा गांधी एयरपोर्ट से चढ़े और राजीव गांधी एयरपोर्ट पर उतर गए। हर जगह जब एक ही परिवार का नाम रखने की परंपरा छ दशकों तक रही तो इसी प्रकार का निर्माण और नामकरण तीर्थस्थानों पर भी कांग्रेस अपने समय में कर सकती थी। किसी दुर्गम तीर्थस्थान पर राजीव रोपवे बनवा देती। सब लोग वहाँ भी इनका नाम लेते। लेकिन नहीं किया।
उसी प्रकार हर चीज़ में समाजवादी नामकरण करने वाली सपा भी चाहती तो तीर्थस्थानों पर समाजवादी सरोवर बनवा देती। लेकिन इन्होंने सनातन की सेवा करना तो दूर रामभक्तों पर बेशर्मी से गोलियाँ चलवाईं।
यही पाप उन्हें गर्त में ले जा रहा है। लेकिन यह पाप सिर्फ भाजपा और माननीय प्रधानमंत्री जी के विरुद्ध अनर्गल प्रलाप से नहीं धुलेगा जैसा कि ये लोग मणिकर्णिका घाट और काशी को लेकर कर रहे हैं।
काशी बाबा विश्वनाथ की है। जो भी हो रहा है उन्ही को अर्पण !
