नई दिल्ली। भारत द्वारा अप्रैल 2025 में चलाए गए ऑपरेशन सिंदूर ने न सिर्फ आतंकवाद के खिलाफ देश की मजबूत रणनीति को दिखाया, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की कूटनीतिक सक्रियता को भी मजबूती दी। अमेरिकी फॉरेन एजेंट्स रजिस्ट्रेशन एक्ट (FARA) के तहत सार्वजनिक हुए दस्तावेजों के अनुसार, इस ऑपरेशन के बाद पाकिस्तान गहरे दबाव में आ गया था और संघर्ष रोकने के लिए उसने अमेरिका में व्यापक स्तर पर संपर्क साधे। रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तान ने अपने राजनयिकों और लॉबिंग फर्मों के जरिए अमेरिका के शीर्ष प्रशासनिक अधिकारियों, सांसदों, पेंटागन और विदेश विभाग से करीब 60 बार संपर्क किया। इसका उद्देश्य भारत पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बनाकर तनाव को कम कराना था। इसके लिए पाकिस्तान ने करीब 45 करोड़ रुपये खर्च कर छह अमेरिकी लॉबिंग फर्मों की सेवाएं लीं। वहीं, भारत ने भी पूरी तरह पारदर्शी और वैधानिक तरीके से अपने पक्ष को मजबूती से रखने के लिए कूटनीतिक प्रयास किए। अमेरिकी लॉबिंग फर्म SHW पार्टनर्स LLC की रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय दूतावास ने अमेरिका में भारत-अमेरिका संबंधों, व्यापार समझौतों और ऑपरेशन सिंदूर से जुड़ी मीडिया कवरेज पर संवाद बढ़ाने के लिए फर्म की सेवाएं लीं।
FARA दस्तावेजों में बताया गया है कि 10 मई 2025 को भारतीय दूतावास की ओर से व्हाइट हाउस चीफ ऑफ स्टाफ सूसी वाइल्स, यूएस ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव जेमिसन ग्रीर और नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के रिकी गिल से संपर्क साधने में मदद की गई। इसी दिन भारत और पाकिस्तान के बीच चार दिन तक चला सैन्य टकराव समाप्त हुआ।
भारतीय विदेश मंत्रालय के सूत्रों ने स्पष्ट किया कि अमेरिका में लॉबिंग फर्मों के माध्यम से संवाद करना कानूनी, स्थापित और सामान्य कूटनीतिक प्रक्रिया है। भारत दशकों से आवश्यकता अनुसार ऐसी सेवाओं का उपयोग करता रहा है और इससे जुड़ा पूरा रिकॉर्ड अमेरिकी न्याय विभाग की वेबसाइट पर सार्वजनिक रूप से उपलब्ध है। इसे किसी भी तरह की मध्यस्थता के रूप में देखना तथ्यात्मक रूप से गलत है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऑपरेशन सिंदूर ने आतंकवाद के खिलाफ भारत की जीरो टॉलरेंस नीति को स्पष्ट किया और यह संदेश दिया कि भारत अपनी सुरक्षा और संप्रभुता को लेकर किसी भी स्तर पर सख्त कदम उठाने में सक्षम है। साथ ही, कूटनीतिक मोर्चे पर भारत ने संतुलित और जिम्मेदार रवैया अपनाते हुए वैश्विक साझेदारों से संवाद बनाए रखा।
