नई दिल्ली : ग्रामीणों को 100 दिन के रोजगार की गारंटी देने वाली मनरेगा योजना अब नए नाम और कलेवर में लागू होगी. मनरेगा का नया रूप रूप “विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) बिल 2025 यानी ‘VB-G RAM G ‘ तैयार कर लिया है. इस बिल को इसी शीतकालीन सत्र में लोकसभा में पेश किया जाएगा. नए बिल में कहा गया है कि इसका उद्देश्य ‘विकसित भारत 2047’ के राष्ट्रीय विजन के अनुरूप ग्रामीण विकास का नया ढांचा तैयार करना है. मनरेगा में बदलाव सिर्फ नाम का नहीं, बल्कि काम और दाम के तौर-तरीकों का भी है. नई योजना में काम के दिन ज्यादा होंगे तो साथ ही मजदूरों को पारिश्रमिक भी जल्दी मिलेगा. राज्यों को भी जेब ढीली करनी होगी क्योंकि फंडिंग का गणित भी बदलने वाला है. मनरेगा में जहां योजना का बड़ा खर्च केंद्र सरकार उठाती थी, वहीं नई स्कीम में राज्यों को भी पैसे देने होंगे.
मरेगा साल 2006 में लागू हुई थी. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक तब से इस पर 11.74 लाख करोड़ रु. खर्च हो चुके हैं। इसमें से 7.8 लाख करोड़ रु. 2014 से अब तक खर्च हुए हैं. सरकार ने इस योजना को बदलने के लिए दो बड़े तर्क दिए हैं. पहला, 2005 में जब मनरेगा शुरू हुई, तब ग्रामीण बेरोजगारी बड़ी चुनौती थी. 2011-12 में ग्रामीण बेरोजगारी 25.7% से घटकर 2023-24 में 4.86% रह गई. दूसरा, तमाम कोशिशों के बावजूद मनरेगा में फर्जीवाड़ा नहीं रुक रहा है. 2024-25 में करीब 194 करोड़ रुपये का दुरुपयोग सामने आया.
UPA की मनरेगा से कितनी होगी G RAM G योजना
मनरेगा और यह GRAM G योजना अलग होगी. इसे आज की जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाया गया है. इसमें काम ज्यादा मिलेगा, श्रमिकों को पारिश्रमिक जल्दी मिलेगा और फंडिग में राज्यों को भी हिस्सा देना होगा. आइये मनरेगा और GRAM G के चार मुख्य अंतरों को जानते हैं..
रोजगार के दिनों की संख्या में इजाफा : मनरेगा में हर ग्रामीण परिवार को जो बिना कौशल वाला काम करने को तैयार होता था उसे 100 दिन रोजगार की गारंटी मिलती है. नई योजना में हर साल 125 दिन रोजगार की गारंटी होगी. यानी हर वित्त वर्ष में 25 दिन ज्यादा काम मिलेगा.
फंडिंग का बदला पैटर्न : VB-G RAM G बिल में फंडिंग पैटर्न में भी बदलाव का प्रस्ताव दिया गया है. मनरेगा के तहत जहां स्कीम का पूरा खर्च केंद्र सरकार उठाती थी, वहीं नई स्कीम में राज्यों को भी खर्च में हिस्सा देना होगा. इसके तहत पूर्वोत्तर राज्यों, हिमालयी राज्यों में स्कीम का 90 फीसदी केंद्र और 10 फीसदी खर्च राज्य सरकार उठाएंगी. वहीं, दूसरे राज्यों में 60 फीसदी केंद्र सरकार और 40 फीसदी खर्च राज्य सरकार उठाएंगी.
कृषि कार्यों के सीजन में नहीं मिलेगा काम : VB-G RAM G बिल में प्रावधान किया गया है कि बुआई और कटाई के मौसम में 60 दिन काम बंद कर दिया जाएगा. इसका उद्देश्य बुआई और कटाई के समय मजदूरों की कमी नहीं होने देना है. मनरेगा में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है.
पेमेंट समय में बदलाव : नए बिल में मनरेगा के उलट हर हफ्ते पेमेंट किया जा सकता है. मनरेगा में 15 दिन में मजदूरी का भुगतान होता था. मजदूरी का भुगतान साप्ताहिक आधार पर या काम पूरा होने के अधिकतम 15 दिनों के भीतर करना अनिवार्य होगा.
