पटना: बिहार में महागठबंधन के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार तेजस्वी यादव को ‘जननायक’ और ‘नायक’ के रूप में पेश करने पर न केवल BJP ने आपत्ति जताई है, बल्कि उनकी अपनी पार्टी RJD के भीतर से भी विरोध के स्वर उठे हैं. RJD के राष्ट्रीय महासचिव अब्दुल बारी सिद्दीकी ने इन उपाधियों पर कड़ी आपत्ति व्यक्त की है.
तेजस्वी को ‘जननायक’ कहना अनुचित
सिद्दीकी ने स्पष्ट किया कि ‘जननायक’ की उपाधि विशेष रूप से पूर्व मुख्यमंत्री और भारत रत्न कर्पूरी ठाकुर के लिए इस्तेमाल की जाती है, और तेजस्वी को यह उपाधि हासिल करने के लिए समय और कड़ी मेहनत की आवश्यकता होगी. सिद्दीकी ने कहा, “तेजस्वी अपने पिता और RJD प्रमुख लालू प्रसाद की विरासत के आधार पर राजनीति में लगे हुए हैं. वह लालू प्रसाद की राजनीति की ‘विरासत’ हैं और उन्हें यह सम्मान अपने पिता और ठाकुर के नक्शेकदम पर चलकर खुद को स्थापित करने के बाद ही मिल सकता है.”
विधानसभा चुनावों से पहले RJD के पोस्टरों में तेजस्वी की तस्वीर को “बिहार का नायक” शीर्षक दिया गया है. इससे पहले, SIR के खिलाफ “वोटर अधिकार यात्रा” के दौरान उन्हें और कांग्रेस नेता राहुल गांधी को ‘जननायक’ कहा गया था, लेकिन कांग्रेस द्वारा सोशल मीडिया पर राहुल को ‘जननायक’ बताते हुए पोस्ट डालने के बाद यह विवाद और बढ़ गया है.
भाई तेज प्रताप और BJP का तंज
तेजस्वी के बड़े भाई तेज प्रताप यादव ने भी इन उपाधियों पर असहमति जताई. उन्होंने कहा कि “खुद को जननायक कहने से कोई लोगों का नेता नहीं बन जाता. कर्पूरी ठाकुर, राम मनोहर लोहिया, अंबेडकर और महात्मा गांधी ही असली जननायक थे.” उन्होंने तेजस्वी व राहुल को “लालू प्रसाद की छत्रछाया” में बताया, और कहा कि यह संरक्षण हटा दिया जाए तो वे “कुछ भी नहीं” होंगे.
BJP प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने सिद्दीकी के बयान को हाथों-हाथ लिया और दावा किया कि न तो जनता और न ही उनके सहयोगी तेजस्वी पर भरोसा करते हैं. वहीं, एक अन्य BJP प्रवक्ता, अजय आलोक, ने कटाक्ष करते हुए कहा कि तेजस्वी “नायक नहीं, बल्कि नालायक” हैं.
