जानें – डायबिटीज और हाई कोलेस्ट्रॉल को कंट्रोल करने में फायदेमंद हैं ये चीज

हेल्थ

ब्लड शुगर को नियंत्रण में रखना चाहते हैं तो मशरूम की नई प्रजाति खोज ली गई है। आपने अब तक कई प्रकार के मशरूम खाए होंगे… कभी आयस्टर, कभी वाइट बटन तो कभी शिटाके मशरूम। सब अच्छी हैं, लेकिन अब आई है मिल्की मशरूम। इसका नाम इसलिए म‍िल्‍की यानी क‍ि दूध‍िया रखा गया है क्योंकि ये व्‍हाइट बटन मशरूम से भी सफेद है।

यह बिल्कुल कड़वी नहीं है। उत्पादन परंपरागत किस्मों की तुलना में 10 प्रतिशत अधिक होने की वजह से किसानों के लिए भी लाभकारी है। सोलन स्थित खुंब अनुसंधान निदेशालय (डीएमआर) के देशभर में स्थित 32 केंद्रों पर तीन वर्ष तक चले परीक्षण के बाद मिल्की मशरूम की डीएमआर – 321 किस्म को विकसित करने में सफलता मिली।

औषधीय गुणों से है भरपूर

आपको बता दें क‍ि इसमें कई औषधीय गुण होते हैं। ये हमारे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाती है। इसमें मौजूद फाइबर और बायोएक्टिव कंपाउंड ब्लड शुगर को नियंत्रित करने में सहायक होते हैं। ये शाकाहारी लोगों के लिए प्लांट बेस्ड प्रोटीन का बेहतरीन स्रोत है। कोलेस्ट्रोल, मधुमेह व पित्त के रोगों के लिए लाभकारी है।

एक महीने में हो जाता है तैयार

इसका सबसे ज्यादा उत्पादन दक्षिण भारत में होता है, लेकिन अन्य राज्यों में भी इसे उगाया जाता है। इसे एक महीने में तैयार किया जा सकता है। वैज्ञान‍िकों ने डीएमआर 321 के अलावा इस वर्ष मिल्की मशरूम की दूसरी नई किस्म डीएमआर मिल्की 299 भी विकसित की है, वह भी अन्य किस्मों की तुलना में अधिक पैदावार देगी।

आठ दिन तक नहीं होती खराब

मिल्की मशरूम की खेती भारत में 30-35 डिग्री सेल्सियस के उच्च तापमान में होती है। अन्य मशरूम की अपेक्षा मिल्की मशरूम सात से आठ दिन तक खराब नहीं होती। इसे तैयार करने में खाद की जरूरत नहीं पड़ती है। भूसे में बीज डालकर तैयार किया जाता है। इसका अचार भी बनता है।

मांग के अनुसार इसका बीज 15 दिन में तैयार कर उत्पादकों को मुहैया करवा देता है। मालूम हो कि खुंब अनुसंधान निदेशालय के 22 राज्यों में 32 केंद्र हैं, जो विभिन्न मशरूम पर अनुसंधान करते हैं।

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