जम्मू : ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तानी सेना ने नियंत्रण रेखा और अंतरराष्ट्रीय सीमा पर मनमाने ढंग से गोलीबारी की, जिसमें 10 नागरिक मारे गए और 33 घायल हो गए. भारतीय सेना ने पाकिस्तान की सेना को मुंहतोड़ जवाब दिया है. ये घटनाक्रम 22 अप्रैल को पहलगाम हमले के जवाब में भारत के जवाबी कदम ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के कुछ घंटों बाद हुआ, जिसमें 26 लोगों की जान चली गई, जिनमें से अधिकतर पर्यटक थे.
जानकारी के अनुसार, पाकिस्तान द्वारा ऑपरेशन सिंदूर के बाद नियंत्रण रेखा पर अंधाधुंध फायरिंग की गई थी. जिससे जम्मू-कश्मीर के पुंछ में 10 लोगों की मौत हो गई और 33 लोग घायल हो गई. घायलों में से कई की हालत गंभीर बताई जा रही है. वहीं, पाकिस्तानी सेना की नापाक हरकत का भारतीय सेना ने मुंह तोड़ जवाब दिया है. जिसमें पाकिस्तानी सेना की चौकियों को भारी नुकसान हुआ है.
भारतीय सेना ने दिया मुंहतोड़ जवाब
रक्षा सूत्रों के अनुसार, भारतीय सेना ने सीमा पार से की गई गोलीबारी का प्रभावी तरीके से जवाब दिया, जिससे कुपवाड़ा और राजौरी-पुंछ सेक्टरों में कई पाकिस्तानी सेना की चौकियों को भारी नुकसान हुआ है. इससे पहले भारतीय सेना ने एक बयान में कहा कि पाकिस्तान की सेना ने नियंत्रण रेखा के पार चौकियों से मनमाने ढंग से गोलीबारी की. इसका हमारी सेना ने प्रभावी तरीके से जवाब दिया है.
इलाका खाली करने का निर्देश
सूत्रों ने बताया कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बुधवार को नियंत्रण रेखा के आसपास वाले नागरिकों को इलाका खाली करने का आदेश दिया है. सूत्रों ने आजतक को बताया कि अमित शाह सीमा सुरक्षा बल के महानिदेशक दलजीत सिंह चौधरी, जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से फोन पर लगातार संपर्क में हैं. गृह मंत्री ने नियंत्रण रेखा के पास के नागरिकों को बकर में सुरक्षित स्थानों पर ट्रांसफर करने का निर्देश दिया, उन्होंने जोर देकर कहा कि उनकी सुरक्षा भारत की प्राथमिकता है.
‘नपी-तुली थी कार्रवाई’
ऑपरेशन सिंदूर के बाद बयान जारी कर सरकार ने कहा, ‘ऑपरेशन सिंदूर के तहत भारत ने पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में नौ आतंकी शिविरों को ध्वस्त कर दिया है. जहां से भारत के खिलाफ हमलों की योजना बनाई गई और उन्हें हमला करने का निर्देश दिया था. ये लक्षित, नपी-तुली और गैर-उकसावे वाली कार्रवाई थी.’
ये बुनियादी ढांचा तीन प्रमुख आतंकी संगठनों- लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी), हिजबुल मुजाहिदीन और जैश-ए-मोहम्मद (जेईएम) से जुड़े थे. अंतरराष्ट्रीय सीमा से लगभग 100 किलोमीटर दूर स्थित बहावलपुर को व्यापक रूप से जैश-ए-मोहम्मद के संचालन का केंद्र माना जाता है और 2019 के पुलवामा हमले के बाद से यह भारत की नज़र में है. मुरीदके, गुलपुर, सवाई, बिलाल कैंप, कोटली कैंप, बरनाला कैंप, सरजाल कैंप और महमूना कैंप पाकिस्तान और PoK में भारत द्वारा मारे गए अन्य आठ स्थान हैं. सूत्रों ने आगे बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस ऑपरेशन पर करीबी नजर रख रहे हैं.