इंजीनियर अतुल सुभाष की आपबीती : 120 तारीखें, 40 बार कोर्ट के चक्कर और जज की घूस की डिमांड,पत्नी-सास समेत 4 पर FIR

उत्तर प्रदेश राज्य लखनऊ शहर

नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश के AI इंजीनियर अतुल सुभाष सुसाइड केस (Atul Subhash Suicide Case) इन दिनों पूरे देश में चर्चा में है. खुदकुशी से पहले उन्होंने 24 पन्ने का एक सुसाइड नोट लिखा था. साथ ही एक वीडियो भी शेयर किया. जो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ है. वीडियो के सामने आने के बाद से ही इस केस में कई सवाल उठ रहे हैं. सुसाइड नोट में बताया कि उनकी पत्नी और पत्नी के घरवालों ने उनके खिलाफ साजिश रची है. उन्हें 9 झूठे केसों (Fake Cases) में फंसाया है. साथ ही महिला जज पर भी अतुल ने गंभीर आरोप लगाए हैं. अतुल ने ऑडियो में कई चौंकाने वाली बातें बताई हैं, जो कि आपको भी सोचने पर मजबूर कर देंगी.
अतुल ने कहा- मेरी मौत के जिम्मेदार पांच लोग हैं. जौनपुर प्रिंसिपल फैमिली कोर्ट जज रीता कौशिक, पत्नी निकिता सिंघानिया, सास निशा सिंघानिया, मेरा साला अनुराग सिंघिया उर्फ पीयूष सिंघानिया, चाचा ससुर सुशील सिंघानिया. आज मैं बताऊंगा कि मेरे बूढ़े-माता पिता और मेरे भाई पर कितने केस डाले गए हैं. हमें कैसे प्रताड़ित किया गया है. हमसे कितने पैसे ऐंठे गए हैं और कैसे मुझे सुसाइड के लिए मजबूर करने की इनडायरेक्ट कोशिश की गई है. ऐसे हालात बना दिए गए हैं कि मेरे पास सुसाइड के अलावा कोई ऑप्शन नहीं है.

40 बार मैं कोर्ट डेट्स को अटेंड करने के लिए मैं बेंगलुरु से जौनपुर जा चुका हूं. इसके अलावा मेरे माता-पिता और भाई को भी कोर्ट के चक्कर काटने पड़ते हैं. एक कोर्ट डेट अटेंड करने के लिए मुझे दो दिन का समय लगता है. मुझे साल में सिर्फ 23 छुट्टियां मिलती हैं. आप अंदाजा लगा सकते हैं कि मेरे लिए कितना मुश्किल होता होगा. ज्यादातर डेट्स पर कुछ नहीं होता है. या तो जज छुट्टी पर होते हैं, या वकीलों की हड़ताल होती है या फिर दूसरा वकील अगली डेट की डिमांड कर सकता है. यानि आप बस अपना समय बर्बाद करते हो कोर्ट जाकर.

इंजीनियर सुभाष ने अपनी सुसाइड नोट में और भी कई बातें कहीं. ये वीडियो 90 मिनट से भी ज्यादा का है. अंत में अतुल ने अपनी आखिरी इच्छा जाहिर की है, जिसमें कहा है कि उनके मामलों की सारी सुनवाई लाइव होनी चाहिए और देश के लोगों को पता चलना चाहिए कि हमारी कानूनी व्यवस्था किस बुरे दौर से गुजर रही है. अपने वीडियो में अतुल सुभाष ने बताया कि अभी तक अपने मुकदमों में उन्हें कोर्ट से 120 तारीखें मिल चुकी हैं, 40 इस बार वह खुद बेंगलुरु से यूपी के जौनपुर जा चुके थे. केस के सिलसिले में उनके माता-पिता और भाई को भी कोर्ट के चक्कर काटने पड़ रहे हैं.

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