नई दिल्ली : पूर्व विदेश मंत्री और कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री सुमनहल्ली मल्लैया कृष्णा का मंगलवार को निधन हो गया है. कृष्णा 92 साल में अंतिम सांस ली. 2009 से 2012 तक भारत की विदेश नीति को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले कृष्णा का लंबी बीमारी के बाद बेंगलुरु में उनके आवास पर निधन हो गया.
कृष्णा 1999 से 2004 तक कर्नाटक के मुख्यमंत्री रहे, जिसके दौरान उन्हें बेंगलुरु को देश के प्रौद्योगिकी केंद्र में बदलने का श्रेय दिया गया, जिससे शहर को “भारत की सिलिकॉन वैली” की उपाधि मिली.
एक पारिवारिक सूत्र के हवाले से बताया, “92 वर्षीय वरिष्ठ राजनेता पिछले कुछ समय से बीमार थे. एसएम कृष्णा अब नहीं रहे. उन्होंने अपने आवास पर सुबह 2:45 बजे अंतिम सांस ली. उनके पार्थिव शरीर को आज मद्दुर ले जाया जा सकता है.”
कई पदों पर निभाई महत्वपूर्ण भूमिका
कर्नाटक के मुख्यमंत्री के रूप में अपनी भूमिका के अलावा, कृष्णा ने अपने पूरे राजनीतिक जीवन में कई महत्वपूर्ण पदों पर काम किया. वे 2009 से 2012 तक केंद्रीय विदेश मंत्री रहे और 2004 से 2008 तक महाराष्ट्र के राज्यपाल रहे. कृष्णा ने अपना राजनीतिक जीवन 1960 के दशक में शुरू किया था. 1962 में उन्होंने मद्दुर विधानसभा सीट से निर्दलीय के तौर पर चुनाव लड़ा और कांग्रेस उम्मीदवार को हराकर जीत हासिल की. बाद में वे प्रजा सोशलिस्ट पार्टी में शामिल हो गए और 1968 में उपचुनाव में मांड्या लोकसभा सीट से जीत हासिल की. कृष्णा 1971 में कांग्रेस में वापस आए और उसी लोकसभा सीट से दोबारा जीते.
पद्म विभूषण से हो चुके हैं सम्मानित
1985 में वे राज्य की राजनीति में लौट आये और 1999 में कर्नाटक के मुख्यमंत्री बने तथा 2004 तक इस पद पर रहे. 2017 में, कृष्णा ने अपने राजनीतिक करियर में एक महत्वपूर्ण बदलाव किया जब उन्होंने कांग्रेस छोड़ दी और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल हो गए. 2023 में, उन्हें भारतीय राजनीति में उनके योगदान के लिए पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया.