फनी होने का मतलब ये नहीं की मेरे अंदर इमोशनल नहीं है या मैं एक अच्छी एक्टर नहीं हूं

मनोरंजन

सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहने वाले बॉलीवुड एक्टर्स में से एक सारा अली खान की ऑफ स्क्रीन इमेज एक फनी और बिंदास एक्ट्रेस की है. वो लगातार सोशल मीडिया पर और अपने प्रोजेक्ट्स की प्रमोशन पर काफी हंसी-मजाक करती रहती हैं. सारा के बात करते हुए जोक्स लगातार आते रहते हैं. ऐसे में अगर कोई उनकी पर्सनालिटी के इस साइड को ‘गंभीरता की कमी’ भी मान बैठे तो कोई हैरानी की बात नहीं है.

सारा खुद भी ये बात मानती हैं कि उनका इस तरह ‘लाउड और बिंदास’ दिखना कई बार लोगों को हैरान कर जाता है और वो उन्हें ‘सीरियस’ नहीं लेते. 2018 में ‘केदारनाथ’ से अपने डेब्यू के पहले ही उनकी इमेज एक ‘कॉन्फिडेंट यंग लड़की’ की बन गई थी. इसकी वजह थी ‘कॉफी विद करण’ पर उनका अपीयरेंस, जिसमें वो काफी इंटेलिजेंट बातें कर रही थीं. उनकी ये इमेज आज भी है, बस इसके साथ उनकी ये फनी साइड भी जुड़ गई है. लेकिन सारा ये जानती हैं कि इस तरह ‘फनी’ दिखने के अपने नुक्सान होते हैं.

क्या ‘स्टार’ की इमेज को नुकसान पहुंचा रहा है ‘फनी’ होना?
सारा ने एक नए इंटरव्यू में कहा कि उन्हें इस ‘फनी’ इमेज का नुकसान पता है. इंडियन एक्सप्रेस के साथ बातचीत में उन्होंने कहा, ‘चूंकि मैं फनी हूं, लाउड हूं, मैं बिंदास हो सकती हूं, लोगों को लगता है मुझमें बस इतना ही है.’

सारा ने आगे कहा, ‘वो भी मैं ही हूं. अगर मैं दो कप कॉफी और पी लूं मैं आपके साथ एडल्ट जोक्स मारने लग जाउंगी. लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि मुझमें शालीनता नहीं है, कि मेरी पर्सनालिटी में कोई वजन नहीं है. लोग एक्सट्रीम में चले जाते हैं- ऐसा होगा या वैसा होगा. दोनों क्यों नहीं हो सकता? मुझमें सेन्स ऑफ ह्यूमर और सेल्फ रिस्पेक्ट एकसाथ क्यों नहीं हो सकता?’

सारा ने कहा कि इससे उनकी ‘स्टार’ वाली इमेज और रियल पर्सनालिटी में कोई कनफ्लिक्ट नहीं होता. शर्त एक ही है कि लोग उन्हें वैसा ही रहने दें, जैसी वो हैं. उन्होंने कहा, ‘मैं ऐसी ही हूं, मेरे अंदर बचकानापन है, मैं फनी हूं- लेकिन मैं सिर्फ इतनी ही नहीं हूं. एक रिस्क ये है कि मैं कभी-कभी खुद को ही ट्रिवियलाइज कर सकती हूं, रिस्क रहता है कि लोग मुझे सीरियसली नहीं लेंगे.’

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