लखनऊ के प्रेक्षागृह में रानी लक्ष्मीबाई जयंती के अवसर पर नाटक वीरांगना झांसी की रानी लक्ष्मीबाई का मंचन किया गया।

उत्तर प्रदेश राज्य लखनऊ शहर

संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार की गुरु-शिष्य अनुदान योजना के अंतर्गत रंगमण्डल “विजय बेला एक कदम खुशियों की ओर” के द्वारा, बुन्देलखण्ड सांस्कृतिक एवं सामाजिक सहयोग परिषद के तत्वावधान में अंतरराष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान, गोमती नगर, लखनऊ के प्रेक्षागृह में रानी लक्ष्मीबाई जयंती के अवसर पर नाटक वीरांगना झांसी की रानी लक्ष्मीबाई का मंचन किया गया। नाटक रानी लक्ष्मीबाई के जीवन व उनके त्याग और बलिदान पर आधारित रहा। भारत में जब भी महिलाओं के सशक्तिकरण की बात होती है तो महान वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई की चर्चा जरूर होती है। रानी लक्ष्मीबाई न सिर्फ एक महान नाम है बल्कि वह एक आदर्श है उन सभी महिलाओं के लिए जो खुद को बहादुर मानती हैं, और उनके लिए भी एक आदर्श है जो महिलाएं ये सोचती हैं की वो महिलाएं हैं और कुछ नहीं कर सकती। देश के पहले स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली रानी लक्ष्मी बाई के अप्रीयतम शौर्य से चकित होकर अंग्रेजों ने भी उनकी प्रशंसा की थी। नाटक के जरिए बताया गया कि किस तरह लक्ष्मीबाई ने अपने देश के लिए अंग्रेजों को टक्कर दी, उन्होंने अपनी मातृभूमि की रक्षा के लिए किस तरह से अपनी जान की बाजी लगा दी। रानी लक्ष्मीबाई गहनों के स्थान पर तीर तलवार को अपना असली श्रृंगार मानती थी। नाटक में रानी की परछाई वीरांगना झलकारी बाई के शौर्य को भी दिखाया गया। रानी ने दुर्गावाहिनी दल बनाकर महिलाओं को युद्ध कौशल सिखाया व उन्हें अपनी मातृभूमि की रक्षा के लिए अपना सर्विस न्योछावर करने के लिए प्रोत्साहित किया। रानी लक्ष्मीबाई ने लॉर्ड डलहौजी की राज्य हड़पने की नीति का खुलकर विरोध किया व अंग्रेजो से सीधा मुकाबला किया, और अपनी मातृभूमि की रक्षा के लिए अंग्रेजो से लड़ते लड़ते अपने प्राणों की आहूति दी। बुंदेले हरबोलों के मुंह हमने सुनी कहानी थी खूब लड़ी मर्दानी वह तो झांसी वाली रानी थी महेंद्र भीष्म जी द्वारा लिखित इस नाटक का निर्देशन चंद्रभाष सिंह ने किया वहीं मंच पर जूही कुमारी, अनमोल धूलियानी, निहारिका कश्यप, अनामिका रावत, साक्षी अवस्थी, प्रियांशी मौर्या, बृजेश कुमार चौबे, सुन्दरम मिश्र, करन दीक्षित, प्रणव श्रीवास्तव, अभय सिंह, आर्यन सिंह, ओमकार पुष्कर, राहुल गौतम, श्रेयांश यादव, रामकृष्ण शुक्ल, सूरज कुमार, अर्जुन सिंह आदि ने शानदार अभिनय किया वहीं नाटक का सहनिर्देशन व पार्श्वसंगीत संकलन बृजेश कुमार चौबे ने किया व संगीत संचालन आयुष कुमार ने किया।

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