ED के केस को रद्द करने की मांग वाली अभिषेक बनर्जी की याचिका खारिज

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कोलकाता। कलकत्ता उच्च न्यायालय में शुक्रवार का दिन तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के लिए बेचैनी और राहत दोनों लेकर आया।

न्यायमूर्ति तीर्थंकर घोष ने पश्चिम बंगाल में करोड़ों रुपये के स्कूल में नौकरी के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा उनके खिलाफ दायर प्रवर्तन मामले की सूचना रिपोर्ट (ईसीआईआर) को खारिज करने की बनर्जी की याचिका को खारिज कर दिया।

हालांकि, पीठ ने उन्हें ईसीआईआर के आधार पर ईडी की किसी भी दंडात्मक कार्रवाई के खिलाफ अंतरिम सुरक्षा प्रदान की। न्यायमूर्ति ने कहा कि चूंकि ईसीआईआर में प्रारंभिक निष्कर्ष मामले के एक अन्य आरोपी सुजय कृष्ण भद्र के कुछ बयानों पर आधारित हैं, इसलिए उस ईसीआईआर के आधार पर फिलहाल उनके खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जा सकती है।

हालांकि केंद्रीय एजेंसी को इस मामले में उन्हें बुलाने या पूछताछ करने पर कोई प्रतिबंध नहीं होगा, लेकिन वे ईसीआईआर के आधार पर उनकी गिरफ्तारी सहित कोई भी दंडात्मक कार्रवाई नहीं कर पाएंगे।

ईसीआईआर को खारिज करने की याचिका को खारिज करते हुए न्यायमूर्ति घोष ने कहा कि चूंकि मामले की जांच जारी है, इसलिए खारिज करने की याचिका अभी शुरुआती चरण में है और इसलिए अदालत इस चरण में कोई निर्देश नहीं देगी।

यह आदेश तब आया है जब एक दिन पहले बनर्जी ने नई दिल्ली में पत्रकारों को बताया था कि उन्होंने अपनी संपत्ति और बैंक खाते का विवरण ईडी को 2020 में ही जमा कर दिया था जब वह पहली बार केंद्रीय एजेंसी कार्यालय गए थे।

उन्होंने कहा, “मुझे केंद्रीय एजेंसियों ने पांच बार बुलाया था, इनमें से चार बार ईडी ने और एक बार सीबीआई ने बुलाया । मेरी पत्नी को चार बार बुलाया गया है। मैं अब ईडी को सीबीआई को महत्व नहीं देता।”

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