यमुना को बचाने के लिए ‘जल सहेलियों’ की 500 किलोमीटर कि यात्रा 29 जनवरी से दुनिया की सबसे लंबी महिलाओं की यमुना यात्रा 29 जनवरी को पंचनद, जालौन इटावा से प्रारंभ होगी। बुदेलखंड क्षेत्र में पिछले लगभग एक दशक से जल सहेलियों के नाम से चर्चित जल संरक्षण पर कार्यरत महिलाओं का एक सशक्त संगठन लगातार सक्रिय रहा है। इस संगठन ने क्षेत्र की छह सूखी नदियों को पुनर्जीवित करने के साथ-साथ हजारों तालाबों को बचाने और संवारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इनके कार्यों की सराहना देश के प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति सहित अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी की जा चुकी है।
अब जल सहेलियाँ लगभग 500 किलोमीटर से अधिक की यमुना यात्रा पर निकल रही हैं, जो 29 जनवरी, पचनद से प्रारंभ होकर दिल्ली तक जाएगी। इस यात्रा का उद्देश्य लोगों को यमुना नदी के प्रति जागरूक करना, उसके संरक्षण, अविरलता और निर्मलता के महत्व को समझाना तथा समाज को इस अभियान से जोड़ना है।
यह महिलाओं का एक समर्पित कैडर है, जो अपने कार्यों के लिए न तो किसी सरकारी और न ही किसी गैर-सरकारी संस्था से सहयोग प्राप्त करता है, बल्कि अपनी स्वयं की मेहनत, श्रम और समर्पण से नदियों के पुनर्जीवन के लिए कार्य कर रहा है। वर्तमान में यह संगठन यमुना की अविरलता और निर्मलता के लिए संगठित प्रयास कर रहा है, जिसमें 3000 से अधिक समर्पित महिलाएँ जुड़ी हुई हैं।
जल सहेली संगठन की राष्ट्रीय अध्यक्ष पुष्पा देवी ने बताया कि यह कार्य हजारों महिलाओं के सामूहिक सहयोग से किया जा रहा है। यमुना नदी भारत की प्रमुख पुण्यदायिनी नदियों में से एक है, जिसका भगवान श्रीकृष्ण के साथ गहरा धार्मिक, सांस्कृतिक और पौराणिक संबंध रहा है। इसके बावजूद यह नदी आज धीरे-धीरे अत्यधिक प्रदूषित होती जा रही है।
यमुना को बचाने का कार्य पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। इसी उद्देश्य को लेकर यह यात्रा प्रारंभ की जा रही है, जो लगभग एक महीने तक चलेंगी। यह यात्रा जालौन से प्रारंभ होकर इटावा, आगरा, मथुरा और हरियाणा होते हुए फरीदाबाद, पलवल और दिल्ली तक पहुँचेगी।
