देश में 4 नए लेबर कोड लागू, 29 पुराने कानून खत्म, जानिए आपकी सैलरी और छुट्टियों पर क्या होगा असर?

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नई दिल्‍ली : देश में चार नए लेबर कोड (Labour code) लागू हो गए हैं. इसे लेबर सिस्टम में अब तक का सबसे बड़ा बदलाव बताया जा रहा है. इन लेबर कोड की खास बातों में सभी वर्कर्स के लिए समय पर मिनिमम वेज की गारंटी शामिल है. इसके साथ ही युवाओं के लिए अपॉइंटमेंट लेटर की गारंटी, महिलाओं के लिए बराबर वेतन और सम्मान की गारंटी, 40 करोड़ वर्कर्स के लिए सोशल सिक्योरिटी की गारंटी, फिक्स्ड-टर्म एम्प्लॉइज के लिए एक साल की नौकरी के बाद ग्रेच्युटी की गारंटी आदि प्रमुख है. सरकार का दावा है कि नए लेबर कोड्स 40 करोड़ से ज्यादा कामगारों के जीवन में बदलाव लाएंगे. विशेषज्ञों का कहना है कि यह बदलाव जितना बड़ा है, लंबे समय में इसका फायदा भी उतना ही ज्‍यादा कर्मचारी और कंपनियों को मिलेगा.

सरकार ने चारों लेबर कोड्स को कल ही तुरंत प्रभाव से लागू कर दिया. उद्योग जगत को उम्मीद थी कि इसके लिए कुछ समय दिया जाएगा, लेकिन अचानक लागू होने के बाद कंपनियों और HR टीमों को अपनी नीतियों और प्रक्रियाओं को तुरंत नए नियमों के हिसाब से बदलना होगा. शुक्रवार को केंद्र सरकार ने जिन चार लेबर कोड की अधिसूचना जारी की, वे हैं-कोड ऑन वेजेज 2019, ऑक्यूपेशनल सेफ्टी एंड हेल्थ एंड वर्किंग कंडीशंस कोड (OSHWC), इंडस्ट्रियल रिलेशंस कोड और सोशल सिक्योरिटी कोड. ये चारों कोड मिलकर देश के लगभग 29 पुराने श्रम कानूनों को एक सरल और आधुनिक ढांचे में बदलते हैं.

परिवर्तनकारी कदम
एक रिपोर्ट के अनुसार, विशेषज्ञों का कहना है कि ये लेबर कोड उद्योग और कर्मचारी, दोनों को फायदा पहुंचाएंगे. इससे उद्योगों को स्थिरता मिलेगी और नौकरी के अवसर बढेंगे. सीआईआई के डायरेक्टर जनरल चंद्रजीत बनर्जी ने इस कदम को “परिवर्तनकारी” बताया. उनके मुताबिक, यह सुधार न केवल वेतन और सामाजिक सुरक्षा को बेहतर बनाएगा, बल्कि काम करने की जगह को ज़्यादा सुरक्षित और नियमों को ज़्यादा स्पष्ट बनाएगा.

डेलॉयट इंडिया के पार्टनर सुधाकर सेथुरमन का कहना है कि यह बदलाव समय की मांग था. सरकार ने ऐसे समय में इसे लागू किया जब भारत तेजी से AI और नई तकनीकों को अपना रहा है. ऐसे दौर में कर्मचारियों के हितों को सुरक्षित रखने के लिए नए लेबर कोड अहम भूमिका निभाएंगे. ये नियम भविष्य की कार्य संस्कृति को ध्यान में रखकर बनाए गए हैं और भारत की तेजी से बदलती अर्थव्यवस्था के साथ तालमेल बैठाते हैं.

कंपनियों को करने होंगे अहम बदलाव
विशेषज्ञ का कहना है कि नए लेबर कोड के तहत कंपनियों को कई महत्वपूर्ण बदलाव करने होंगे. जैसे कर्मचारियों की वार्षिक स्वास्थ्य जांच अब अनिवार्य होगी. निश्चित अवधि (फिक्स्ड-टर्म) कर्मचारियों को भी ग्रेच्युटी मिलेगी. ऐप बेस्ड डिलीवरी बॉय या ड्राइवर जैसे गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स को भी सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाया जाएगा. इसके अलावा, कंपनियों को समय पर वेतन देना अब पहले से ज़्यादा सख़्ती से लागू होगा.

अनुपालन के मोर्चे पर भी बदलाव बड़े हैं. अब कंपनियों को अखिल भारतीय लाइसेंसिंग, एकल पंजीकरण और संयुक्त रिटर्न जैसी सुविधाएं मिलेंगी. यानी कागजी काम और फाइलिंग कम हो जाएगी. इससे छोटे और मध्यम उद्योगों को काफी राहत मिलेगी. ग्रांट थॉर्नटन भारत के पार्टनर अखिल चंदना ने बताया कि राज्य सरकारों के अपने “Shops & Establishments” कानून अब भी लागू रहेंगे. यानी कुछ मामलों में जैसे छुट्टियां, ओवरटाइम या कार्य के घंटे केंद्र और राज्य के नियमों में ओवरलैप हो सकता है. ऐसे में कंपनियों को बहुत सावधानी से अनुपालन करना होगा ताकि किसी भी तरह की गलती न हो.

लॉन्‍ग टर्म में होगा बहुत फायदा
इकनॉमिक लॉज प्रैक्टिस के मैनेजिंग पार्टनर सुहैल नथानी का कहना है कि इन लेबर कोड्स के क्रियान्वयन में कंपनियों को बड़े परिचालन बदलाव करने पड़ेंगे. लेकिन लंबी अवधि में ये कोड असंगठित क्षेत्र के कर्मचारियों को सुरक्षा का मजबूत ढांचा देंगे, पारदर्शिता बढ़ाएंगे और भारत के श्रम बाजार को विश्व मानकों के और करीब ले जाएंगे.

खैतान एंड कंपनी के पार्टनर अंशुल प्रकाश ने कहा कि वेतन लेबर कोड और सोशल सिक्योरिटी लेबर कोड का आंशिक क्रियान्वयन तो पहले से ही अपेक्षित था. पर अब असली भूमिका होगी केंद्र और राज्य के स्तर पर काम कर रहे उन अधिकारियों की है जो इन कोड्स को लागू करेंगे. विशेषज्ञों का कहना है कि अगर वे दंडात्मक रवैये की बजाय सहयोगी सोच अपनाएं तो इन कोड्स का क्रियान्वयन सुचारू और प्रभावी हो पाएगा.

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