अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट केस में 38 दोषियों को फांसी की सजा, 11 को उम्रकैद

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नई दिल्ली: Ahmedabad Bomb Blast : अहमदाबाद में 26 जुलाई 2008 को हुए सीरियल ब्लास्ट मामले के दोषियों को शुक्रवार को सजा सुनाई गई. इस मामले में 49 दोषियों में से 38 दोषियों को फांसी और 11 को उम्रकैद की सजा सुनाई गई है. 8 फरवरी को सिटी सिविल कोर्ट ने 78 में से 49 आरोपियों को UAPA (गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम) के तहत दोषी करार दिया था. विशेष न्यायाधीश एआर पटेल ने फैसला सुनाते हुए विस्फोटों में मारे गए लोगों को एक लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है. 8 फरवरी को विशेष न्यायाधीश ने कुल 78 आरोपियों में से 49 को भारतीय दंड संहिता के विभिन्न अपराधों के तहत दोषी घोषित किया था, जिसमें हत्या, देशद्रोह और राज्य के खिलाफ युद्ध छेड़ने के साथ-साथ गैरकानूनी गतिविधियों (रोकथाम) के अपराध भी शामिल थे. एक दोषी को आर्म्स एक्ट के तहत अपराध का भी दोषी पाया गया है.

उन्होंने गंभीर रूप से घायलों को 50,000 रुपये और मामूली रूप से घायलों को 25,000 रुपये का मुआवजा देने का भी आदेश दिया. एक आरोपी उस्मान अगरबत्तीवाला, जो शस्त्र अधिनियम के तहत दोषी ठहराया गया और मौत की सजा पाने वालों में से एकमात्र है, को अतिरिक्त रूप से शस्त्र अधिनियम के तहत दोषी ठहराए जाने पर एक वर्ष के कारावास की सजा सुनाई गई है. आईपीसी, यूएपीए, विस्फोटक पदार्थ अधिनियम और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान की रोकथाम अधिनियम की प्रत्येक धारा के तहत 49 दोषियों में से प्रत्येक को दी गई सजाएं साथ-साथ चलेंगी. साथ ही अदालत ने सभी 48 दोषियों पर 2.85 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है. अगरबत्तीवाला पर शस्त्र अधिनियम के तहत अतिरिक्त सजा के साथ 2.88 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है.

8 फरवरी को करार दिय गया था दोषी

8 फरवरी को विशेष न्यायाधीश ने कुल 78 आरोपियों में से 49 को भारतीय दंड संहिता के विभिन्न अपराधों के तहत दोषी करार दिया गया था, जिसमें हत्या, देशद्रोह और राज्य के खिलाफ युद्ध छेड़ने के साथ-साथ गैरकानूनी गतिविधियों (रोकथाम) के अपराध और विस्फोटक पदार्थ अधिनियम भी शामिल थे. 26 जुलाई, 2008 को अहमदाबाद में सरकारी सिविल अस्पताल, अहमदाबाद नगर निगम द्वारा संचालित एलजी अस्पताल, बसों, खड़ी साइकिलों, कारों और अन्य स्थानों सहित विभिन्न स्थानों पर 22 बम विस्फोट हुए थे, जिसमें 56 लोग मारे गए थे जबकि 200 लोग घायल हुए थे. 24 बमों में से कलोल और नरोदा में विस्फोट नहीं हुए थे.

 

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