12 अप्रैल तक जेल के बहार रहेगा हरियाणा के पूर्व सीएम ओम प्रकाश चौटाला

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नई दिल्ली [विनीत त्रिपाठी]। रिहाई की मांग को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री ओम प्रकाश चौटाला की याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट ने दिल्ली सरकार को 12 अप्रैल तक हलफनामा दायर करने का निर्देश दिया है। न्यायमूर्ति योगेश खन्ना की पीठ ने दिल्ली सरकार को नोटिस जारी करते हुए ओपी चौटाला की पैरोल 12 अप्रैल तक बढ़ा दी है। इससे पहले अदालत ने चौटाला की पैरोल नौ मार्च तक बढ़ा दी थी। अधिवक्ता अमित साहनी के माध्यम से याचिका दायर कर ओपी चौटाला ने कहा है कि उनकी रिहाई के संबंध में हाई कोर्ट ने नवंबर 2019 एवं फरवरी 2020 में दिल्ली सरकार को उचित फैसला लेना का निर्देश दिया था। हालांकि, अब तक इस पर कोई फैसला नहीं हो सका है। ओम प्रकाश चौटाला ने अपनी उम्र और दिव्यांगता के आधार पर जेल से रिहाई की मांग की है।

इससे पहले दायर याचिका में चौटाला ने केंद्र सरकार की 18 जुलाई 2018 की अधिसूचना का हवाला दिया था। अधिसूचना के तहत 60 साल से ज्यादा उम्र पार कर चुके पुरुष, 70 फीसद वाले दिव्यांग व बच्चे अगर अपनी आधी सजा काट चुके हैं, तो राज्य सरकार उसकी रिहाई पर विचार कर सकती है। याचिका में ओम प्रकाश चौटाला ने कहा था कि उनकी उम्र 86 साल की हो गई है और भ्रष्टाचार के मामले में वे सात साल की सजा काट चुके हैं। उन्होंने यह भी दावा किया था कि वह अप्रैल 2013 में 60 फीसद दिव्यांग हो चुके थे और जून 2013 में पेशमेकर लगाए जाने के बाद से वह 70 फीसद से ज्यादा दिव्यांग हो चुके हैं। इस तरह से वे केंद्र सरकार की जल्दी रिहाई की सभी शर्तो को पूरा कर रहे हैं। हालांकि, दिल्ली सरकार ने इसका विरोध करते हुए कहा था कि यह भ्रष्टाचार का मामला है और भारत सरकार की अधिसूचना इस पर लागू नहीं होती। वर्ष 2000 के 3206 शिक्षक भर्ती घोटाला मामले में विशेष सीबीआइ अदालत ने वर्ष 2013 में ओपी चौटाला, उनके बेटे अजय चौटाला समेत 53 लोगों के खिलाफ सजा सुनाई थी।

ओम प्रकाश चौटाला ने अपनी उम्र और दिव्यांगता के आधार पर जेल से रिहाई की मांग की है।

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