बैंकों ने पिछले वर्ष कमाए 174366 लाख करोड़, फिर क्यों बेच रही है सरकार -बैंक यूनियनों ने पूछे सवाल

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जमशेदपुर, जासं। केंद्र सरकार ने बजट 2021 में सार्वजनिक बैंकों में विनिवेश की घोषणा की है। इसके खिलाफ यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन्स ने अपना विरोध प्रदर्शन तेज कर दिया है। विभिन्न यूनियन के सदस्यों ने बिष्टुपुर बैंक ऑफ इंडिया मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन किया।

इस दौरान यूनियन नेताओं ने कहा कि पिछले वित्तीय वर्ष में देश के विभिन्न बैंकों ने 174336 लाख करोड़ रुपये का मुनाफा कमाया। यूनियन नेताओं ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार पिछले छह वर्षों से बड़े पैमाने में सार्वजनिक उपक्रमों का निजीकरण कर रही है। इसलिए मुनाफे के बावजूद केंद्र सरकार सार्वजनिक बैंकों को छह लाख 61 हजार करोड़ रुपये में बेच रही है। बैंक यूनियन्स के नेताओं का आरोप है कि अब तक बैंकों में होनेवाले मुनाफे का लाभ देश के विकास और जनता की भलाई में खर्च होता था। लेकिन अब निजीकरण के बाद बैंकों में होनेवाला लाभ पूंजीपतियों की तिजोरी में जाएंगे और पूरा नुकसान देश भर के बैंक ग्राहकों को होगा।

निजीकरण के बाद उपभोक्ताओं को हर बैंकिंग सेवा के लिए मोटी रकम पूंजीपति वसूल करेंगे। इसलिए बैंक यूनियन्स ने निजीकरण के खिलाफ 15 व 16 मार्च को किए जा रहे राष्ट्रव्यापी दो दिवसीय हड़ताल में उनका साथ देने और इसके खिलाफ आवाज बुलंद करने का आहवान किया है ताकि बैंकों का निजीकरण रोका जा सके। बैंक कर्मचारियों के प्रदर्शन को बैंक यूनियन्स के समन्वयक रिंटू रजक, आरबी सहाय, हीरा अरकने, डीएन सिंह, टीपी दास सहित बड़ी संख्या में बैंक कर्मचारी उपस्थित थे।

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