होली का त्योहार नजदीक आने के साथ खरीदारी अंतिम दौर में पहुंच गई है। महीने का अंतिम सप्ताह होने के कारण अनुमान लगाया जा रहा था कि अबकी होली फीकी होगी, लेकिन आखिरी दौर में सारा अनुमान निर्मूल साबित हुआ। शहर सहित ग्रामीण क्षेत्रों में जगह-जगह दुकान से लेकर सड़क की पटरियों तक रंग, अबीर और पिचकारी की दुकानें सज गईं तो उस पर खरीदार भी उमड़े। पिचकारी खरीदने के लिए बच्चों में खासा उत्साह देखा जा रहा है। बच्चे अभी से पिचकारी में रंग भरकर अपने लोगों को भिगाने की कोशिश कर रहे हैं।
वहीं खाद्य पदार्थ की दुकानों पर ज्यादा भीड़ रही तो वहीं खोआ के लिए लोग एडवांस बुकिग कराते दिखे। फैशन के दौर में हर कोई नई डिजाइन के कपड़ों की तलाश में था। वहीं महिलाओं ने दुकानदार से नई डिजाइन की साड़ी की मांग की। खासकर माल में लोग खरीददारी करते देखे गए। दूसरी ओर होलिका स्थलों पर लकड़ी, उपला, पुआल आदि रखने का सिलसिला शुरू हो गया है। कहा जाता है कि घर के सामान का स्वाद ही कुछ अलग होता है, सो बाजार से सारी खरीदारी के बाद भी घरों में महिलाएं चिप्स व पापड़ बनाने में जुटी थीं।