राजीव, दुमका: कोविड-19 के दौरान लॉकडाउन में दवा की दुकानें खुलीं थीं, लेकिन दवा खरीदने वाले मरीज दुकानों तक नहीं पहुंच पा रहे थे। लॉकडाउन की वजह से मरीज एवं उनके स्वजन घरों में कैद थे। चिकित्सकों के निजी क्लिनिकों में भी सेवाएं शारीरिक तौर पर कर पाना मुश्किल हो गया था। सरकारी अस्पतालों में भी मरीजों के आने की संख्या काफी कम हो गई थी। हालांकि इस आपदा की स्थिति के बीच ही स्वास्थ्य सेवाओं को प्रभावी बनाने के लिए दुमका में कई नायाब पहल किए गए। इससे न सिर्फ मरीजों को राहत मिली, बल्कि वैसे मरीज जिनकी दवाइयां दुमका में उपलब्ध नहीं थीं, उनके लिए भी दुमका के ड्रगिस्ट एवं केमिस्ट एसोसिएशन ने दवाओं की व्यवस्था कर उनके घर तक पहुंचाने का काम किया।
लॉकडाउन के दौरान एसोसिएशन के जरिए डोर स्टेप डिलेवरी के माध्यम से सिर्फ दवा की कीमत लेकर तकरीबन 3000 घरों तक दवाएं मुहैया कराई गई। वहीं क्वारंटाइन सेंटर में रह रहे मरीजों को भी जरूरत के हिसाब से दवाएं मुहैया कराई गई। तकरीबन एक दर्जन से अधिक वैसे मरीज जिनके पास दवा के लिए पैसे नहीं थे, उन्हें निश्शुल्क दवा मुहैया कराई गई। इस व्यवस्था को सुचारू तरीके से बहाल करने के लिए एसोसिएशन के अध्यक्ष महेश प्रसाद साह, सतीश कुमार जायसवाल, नंदगोपाल मंडल, पोरेश दास, अनिल कुमार जायसवाल, मनोज कुमार मंडल, आशीष कुमार दे, प्रेमलाल शर्मा एवं अनूप कुमार गुप्ता समेत कई सदस्यों ने अहम भूमिका निभाई।