चमोली के तपोवन में हुए हादसे का आज पांचवां दिन है। NTPC की टनल में फंसे 39 वर्कर्स को बचाने की कोशिशें जारी हैं। हालांकि, ऑपरेशन की स्ट्रैटजी में बदलाव किया गया है। अब टनल में 72 मीटर अंदर ड्रिलिंग की जा रही है। 13 मीटर नीचे तक होल किया जाएगा। इसके बाद अंदर कैमरा डालकर नीचे से गुजर रही दूसरी टनल में वर्कर्स के सुरक्षित होने का पता लगाया जाएगा।
ड्रिलिंग देर रात करीब दो बजे शुरू की गई। अब तक साढ़े छह मीटर नीचे तक खुदाई हो चुकी है। पहले 75 मिलीमीटर चौड़ाई का होल किया जा रहा था, लेकिन करीब एक मीटर के बाद उसमें दिक्कत आई। अब करीब 50 मिलीमीटर चौड़ाई का होल किया जा रहा है।
Rescue teams have started drilling operation to peep into the tunnel. We are presently at 6.5 meters: Uttarakhand DGP Ashok Kumar pic.twitter.com/sGn7Y2Wtzz
— ANI (@ANI) February 11, 2021
पहले मलबा हटाकर अंदर तक पहुंचने का प्लान था
इस टनल की लंबाई करीब ढाई किलोमीटर है। इसका ज्यादातर हिस्सा आपदा में आए मलबे से भरा पड़ा है। आर्मी, ITBP, NDRF और SDRF की टीमें बुधवार तक टनल में सीधे पहुंचने की कोशिश कर रही थीं। 120 मीटर अंदर तक मलबा साफ कर लिया गया। हालांकि, इसमें मुश्किलें नजर आईं तो ड्रिलिंग पर विचार किया गया।
ड्रोन और रिमोट सेंसर की मदद भी ली जा रही
रेस्क्यू टीम ने बुधवार को सुरंग में अंदर के हाल जानने के लिए ड्रोन और रिमोट सेंसिंग उपकरणों की मदद भी ली थी। हालांकि, इसमें भी ज्यादा कामयाबी नहीं मिली।
उत्तराखंड में अब तक 32 के शव मिले
उत्तराखंड आपदा के बाद रेस्क्यू के तीसरे दिन यानी मंगलवार को 6 और शव मिले थे। अब तक 32 लोगों के शव मिल चुके हैं। सरकार के मुताबिक, हादसे के बाद 206 लोग लापता हो गए। इनमें से 174 लोगों का अभी तक पता नहीं चल पाया है।
आपदा का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल
चमोली में 7 फरवरी को आई आपदा का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इसमें साफ दिख रहा है कि किस तरह जलस्तर बढ़ने के बाद नदियों ने रास्ते में पड़ने वाली हर चीज को तबाह कर दिया। इस वीडियो में कुछ वर्कर्स यहां बने बांध पर पानी और मलबे से बचने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन वो बच नहीं पाए।
गृह मंत्री ने सदन को बताया- उत्तराखंड के निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा नहीं
गृह मंत्री अमित शाह ने बुधवार को राज्यसभा में उत्तराखंड हादसे पर बताया रविवार को समुद्र तल से करीब 5600 मीटर की ऊंचाई पर 14 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र का ग्लेशियर गिरा था। इससे धौलीगंगा और ऋषिगंगा में बाढ़ की स्थिति बन गई। साथ ही कहा कि उत्तराखंड सरकार के मुताबिक निचले इलाकों में अब बाढ़ का खतरा नहीं है, पानी का लेवल भी कम हो रहा है। ज्यादातर इलाकों में बिजली सप्लाई शुरू हो गई है। साथ ही बॉर्डर रोड ऑर्गेनाइजेशन (BRO) 5 डैमेज पुलों को रिपेयर कर रहा है।