नई दिल्ली : मिडिल ईस्ट में जारी जंग और हॉर्मुज संकट ने पाकिस्तान की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. शहबाज शरीफ सरकार ने आर्थिक तंगी और वैश्विक तेल संकट के बीच एक बड़ा फैसला लेते हुए लग्जरी गाड़ियों में इस्तेमाल होने वाले हाई-ऑक्टेन ईंधन पर भारी शुल्क लगा दिया है.
प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की अध्यक्षता में हुई एक उच्च स्तरीय बैठक में पाकिस्तान सरकार ने हाई-ऑक्टेन ईंधन पर शुल्क को 100 रुपये से बढ़ाकर 300 रुपये प्रति लीटर करने का फैसला किया है. यानी अब लग्जरी गाड़ियों के मालिकों को प्रति लीटर 200 रुपये अतिरिक्त चुकाने होंगे. यह फैसला देश की बिगड़ती आर्थिक स्थिति और वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के दबाव के बीच लिया गया है.
सरकार ने स्पष्ट किया है कि हाई-ऑक्टेन ईंधन की कीमतों में इस बढ़ोतरी का असर सार्वजनिक परिवहन के किरायों और हवाई यात्रा की लागत पर नहीं पड़ेगा. यह शुल्क मुख्य रूप से उन उच्च श्रेणी के वाहनों के लिए है जो प्रीमियम ईंधन का उपयोग करते हैं.
महीने में दूसरी बार बढ़ाईं कीमतें
हाल ही में 6 मार्च को पाकिस्तान सरकार ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 55 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की थी. अब पेट्रोल ₹321.17 और डीजल ₹335.86 प्रति लीटर पर पहुंच गया है. जेट ईंधन की कीमतों में उछाल के कारण 10 मार्च से घरेलू टिकटों में ₹2,800 से ₹5,000 और अंतरराष्ट्रीय टिकटों में ₹10,000 से ₹28,000 तक की भारी वृद्धि की गई है.
दरअसल, ईरान के साथ अमेरिका-इजरायल युद्ध के कारण वैश्विक स्तर पर तेल की आपूर्ति प्रभावित हुई है, जिससे पाकिस्तान जैसे देशों में घरेलू ऊर्जा लागत पर भारी दबाव है. इस बैठक में वित्त मंत्री मोहम्मद औरंगजेब और पेट्रोलियम मंत्री अली परवेज मलिक सहित कई वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे.
सरकार का कहना है कि यह फैसला आर्थिक संतुलन बनाए रखने और आम लोगों पर सीधे बोझ से बचाने के लिए लिया गया है, लेकिन लग्जरी ईंधन महंगा होने से महंगे वाहनों के संचालन की लागत बढ़ेगी.
