लखनऊ: 21 जून (प्रेस विज्ञप्ति) राष्ट्रीय समाजिक कार्य करता संगठन के संयोजक मुहम्मद आफ़ाक़ ने अपने बयान में कहा कि देश की आजादी को 76 साल हो गए हैं, लेकिन आज भी भारत में रहने वाले मुसलमानों को समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है, अब भी वो अपने भविष्य की तलाश में लगे हुए हें। यह नुकसान झूठे नेताओं के प्रतिनिधित्व के कारण हुआ है, जिन्होंने न केवल हमारा वोट धर्मनिरपेक्ष कहे जाने वाले दलों को यह कह कर दिलवाते रहे कि यही हमारा रहनुमा है। जबकि मुसलमानों को संविधान के अनुसार भी सुरक्षा नहीं दी जा सकी। आगे उनहों ने कहा कि आजादी के बाद मुसलमानों की हिस्सेदारी 38 से 40 प्रतिशत थी, आज वह 2 प्रतिशत भी नहीं है, इसका कारण यह है कि कभी हमें अज्ञानी कहकर नजरअंदाज किया गया तो कभी अधिक बच्चे पैदा करने का दोषी ठहराकर भ्रमित किया गया। अब मुसलमानों को अपनी नई पीढ़ी के भविष्य के लिए वोट की चोट को समझना और समझाना होगा। क्योंकि मुसलमानों के पास सिर्फ वोट देने का ही एक हथियार है, उनके पास कोई और वजह नहीं बची है। पिछले 35 वर्षों में, खासकर उत्तर प्रदेश में, मुसलमानों की स्थिति दलितों से भी बदतर बताई गई है, यह सच लगता है। आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने मुसलमानों के लिए 4% आरक्षण संविधान के मुताबिक देने का एलन किया है। संविधान में जो घोषणा की गई है, उसके अनुसार पूरे भारत में मुसलमानों की सुरक्षा और नई पीढ़ी के भविष्य के लिए एक समान नीति होनी चाहिए। अपने-अपने प्रांतों और जिलों में धार्मिक अस्थलों के प्रमुखों के साथ एक आयोजन किया जाना चाहिए जिसमें सभी दलों को एक ज्ञापन दिया जाना चाहिए कि जो वास्तविक अर्थों में सक्रिय हैं। और यह ईमानदार धार्मिक नेताओं द्वारा ही किया जाना चाहिए।
