मोहम्मद मुइज्जू को भारी बहुमत, फिर बनेंगे राष्ट्रपति, भारत-मालदीव रिश्तों में बढ़ेगी खट्टास

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नई दिल्ली : मालदीव में राष्ट्रपति चुनाव के नतीजे आ चुके हैं. एक बार फिर मालदीव के लोगों ने सत्तारूढ़ पीपुल्स नेशनल कांग्रेस (PNC) पर भरोसा जताया है. पार्टी ने संसद में स्पष्ट बहुमत हासिल कर लिया है, रविवार को चुनाव के नतीजे सामने आए. यहां लोगों राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू को भारी बहुमत से जिताया है. मोहम्मद मुइज्जू की PNC ने पहली घोषित 86 सीटों में से 66 सीटें जीतीं, जो 93 सदस्यीय मजलिस या संसद में सुपर-बहुमत के लिए पर्याप्त हैं.

बता दें कि चीन के साथ आर्थिक संबंधों को मजबूत करने के मुइज़ू के उद्देश्य के लिए यह चुनाव काफी महत्वपूर्ण था. PNC और उसके सहयोगियों के पास पिछली संसद में केवल आठ सीटें थीं, बहुमत की कमी के कारण सितंबर में राष्ट्रपति पद की जीत के बाद मुइज्जू की योजनाएं बाधित हो गईं.

संसद की 93 सीटों के लिए 368 उम्मीदवार खड़े थे
पिछले साल राष्ट्रपति के रूप में मुइज्जू के चुनाव के बाद मालदीव का झुकाव चीन की ओर हो गया, नए नेता ने चीन समर्थक रुख अपनाया और देश के एक द्वीप पर तैनात भारतीय सैनिकों को हटाने का काम किया. मालूम हो कि छह राजनीतिक दलों और स्वतंत्र समूहों ने संसद की 93 सीटों के लिए 368 उम्मीदवार खड़े किए थे. 45 वर्षीय मुइज्जू रविवार को सबसे पहले मतदान करने वालों में से थे, उन्होंने राजधानी माले के एक स्कूल में मतदान किया और मालदीव के लोगों से अधिक संख्या में मतदान करने का आग्रह किया.

मुइज्जू का कैंपेन मुद्दा ‘इंडिया आउट’ था
राष्ट्रपति चुनाव के लिए उनके पहले मुइज्जू का कैंपेन मुद्दा ‘इंडिया आउट’ था, जिसमें उन्होंने अपने पूर्ववर्ती पर राष्ट्रीय संप्रभुता से समझौता करने का आरोप लगाया था. बता दें कि भारत के साथ मालदीव के रिश्ते तब और तनावपूर्ण हो गए जब भारतीय सोशल मीडिया पर लोगों ने मालदीव पर्यटन का बहिष्कार अभियान शुरू किया था. यह मालदीव के तीन उपमंत्रियों द्वारा लक्षद्वीप में पर्यटन को बढ़ावा देने के विचार को उठाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बारे में अपमानजनक बयान देने के खिलाफ था.

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