वर्तमान में देश में लोकसभा चुनाव व 04-विधानसभा में उप-चुनाव हो रहा है। कायस्थ समाज हमेशा प्रमुख पार्टियों के साथ राजनैतिक प्रतिक्रिया में सहयोग करता रहा है। यह वर्तमान चुनाव भाजपा, बसपा एवं सपा, कॉंग्रेस गठबन्धन के बीच हो रहा है। देश की दो विचारधाराएँ आमने-सामने होगीं। चुनाव दो-पक्षीय होगा, कायस्थ समाज एक बुद्धिजीवि कौम रही है। ज्यादातर इनकी भूमिका न्यायपालिका या कार्यपालिका तथा नौकरी पेशा में रही है। धीरे-धीरे बदलते समाजिक परिप्रेक्ष्य में अब कायस्थ समाज राजनैतिक प्रक्रिया में भी भागीदारी करने लगा है। कायस्थ समाज के लिए ये विचारणीय विषय है कि कायस्थ समाज को राजनैतिक प्रक्रिया में मजबूत भागीदारी कैसे सुनिश्चित करना होगा। राजनैतिक पार्टियों को इस बात का आभास दिलाना होगा कि कायस्थ समाज किसी पार्टी का बधुवां मजदूर नही है, जो राजनैतिक पार्टी कायस्थ समाज के लोगों को राजनैतिक व सामाजिक रूप से प्रोत्साहित करेगी, कायस्थ समाज भी उनको मदद करेगा और मजबूत करेगा।
यह एक पढ़ा लिखा सम्पन्न बौद्धिक क्षमता से भरा कौम है, जिस व्यवस्था के साथ रहता है, उस व्यवस्था को सम्बृद्धि व सशक्त करता है।
बड़े दुःख
के साथ हमें इस पत्रकार वार्ता में यह कहना पड़ रहा है कि विभिन्न राजनैतिक पार्टियों द्वारा कायस्थ समाज के किसी भी व्यक्ति को प्रत्याशी नहीं बनाया गया, लोकसभा, विधानसभा के उपचुनाव में कायस्थ समाज के प्रत्याशी की घोषणा की जाती है, तो उस पार्टी को कायस्थ समाज ताकत से मजबूत करेगी।
